सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित की गई मलेरिया वैक्सीन अब अफ्रीका में रोलआउट हो चुकी है। इस वैक्सीन को पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से मंजूरी मिली थी। इसे उन क्षेत्रों में वितरित किया जा रहा है जहां मलेरिया का प्रकोप सबसे अधिक है। वहीं इस पहल को मलेरिया के खिलाफ जंग में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वैक्सीन का विकास और मंजूरी
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जिसे विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता कहा जाता है, ने इस मलेरिया वैक्सीन का विकास कई सालों के शोध और परीक्षणों के बाद किया। इस वैक्सीन का नाम ‘R21/Matrix-M’ है और इसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से विकसित किया गया है। 2023 में WHO ने इस वैक्सीन को मंजूरी दी, यह देखते हुए कि यह मलेरिया के रोकथाम में काफी प्रभावी है।
अफ्रीका में मलेरिया की स्थिति
अफ्रीका विशेष रूप से सब-सहारा क्षेत्र मलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित होता है। मलेरिया एक घातक बीमारी है जो प्लास्मोडियम परजीवी के कारण होती है और संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। हर साल मलेरिया से लाखों लोग प्रभावित होते हैं और हजारों मौतें होती हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे होते हैं। ऐसे में यह वैक्सीन इन क्षेत्रों में मलेरिया के खिलाफ एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकती है।
रोलआउट का महत्व
अफ्रीका में इस वैक्सीन का रोलआउट मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर है। वैक्सीन के वितरण और टीकाकरण कार्यक्रम का उद्देश्य मलेरिया संक्रमण की दर को कम करना और इस बीमारी से होने वाली मौतों को रोकना है। कई अफ्रीकी देशों ने इस वैक्सीन को अपनी राष्ट्रीय टीकाकरण योजनाओं में शामिल किया है और इसे प्राथमिकता के आधार पर बच्चों और जोखिम वाले समूहों को दिया जा रहा है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
इस वैक्सीन के रोलआउट ने वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय में उत्साह का माहौल पैदा किया है। WHO ने इस पहल की सराहना की है। यही नहीं डबल्यूएचओ ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। यूनिसेफ, यूएसएआईडी, और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने भी इस प्रयास का समर्थन किया है।
