ये सिनकर आपको कैसा लगेगा कि दो बच्चों की मां एक ही है लेकिन बाप अलग अलग है। शायद आप इस बात से हैरान हो जाएं। लेकिन आज कल ऐसा ही हो रहा है। दरअसल विक्की कौशल की आने वाली फिल्म बैड न्यूज़ इसी सब्जेक्ट के ऊपर बने गयी है। इसे मेडिकल टर्म में हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन कहा जाता है। वहीँ सिनेमाघरों में विक्की कौशल और तृप्ति डिमरी की फिल्म बैड न्यूज आने वाले शुक्रवार को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म का डायरेक्शन आनंद तिवारी ने किया है। फिल्म की कहानी हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन के एक दुर्लभ मामले को लेकर बनाई गयी है।
टेस्ट में सच सामने आता है
आपको बता दें इस फिल्म में तृप्ति डिमरी को प्रेग्नेंट दिखाया गया है। होने वाले बच्चे के पिता का नाम जानने के लिए वह अपने दोनों सेक्स पार्टनर्स का पेटरनिटी टेस्ट करवाती हैं। टेस्ट में पता चलता है कि वो दो बच्चों को जन्म देने वाली है और दोनों बच्चों के पिता अलग-अलग हैं। दुनिया में हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन के कुछ ही मामले सामने आते हैं। इस तरह के केस दुनिया में बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।
आखी क्या होता है Superfetation
आपको बता दें हेटेरोपैटरनल शब्द का मतलब है अलग-अलग पिता और सुपरफेकंडेशन का मतलब है एक ही चक्र के दौरान कई अंडों का निषेचन यानी फर्टिलाइजेशन होना। आनुवंशिक रूप से ये दोनों जुड़वां सौतेले भाई-बहन होते हैं। इनकी मां एक ही होती है लेकिन पिता अलग-अलग हो सकते हैं। सुपरफेटेशन एक दुर्लभ घटना है जहां मौजूदा गर्भावस्था के साथ दूसरी गर्भावस्था शुरू हो जाती है। वहीँ सुपरफेटेशन के मामले में दो भ्रूण एक ही गर्भ में पल रहे होते हैं।
महिला दो अंडे रिलीज करती है
आपको बता दें एक महिला एक ही समय में दो अंडे रिलीज कर सकती है क्योंकि शुक्राणु गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब में कुछ दिनों तक जीवित रह सकते हैं। एग रिलीज होने से पहले अगर महिला किसी दूसरे पुरुष के साथ इंटरकोर्स कर ले तो इस तरह की स्थिति बनने की आशंका रहती है। सुपरफेटेशन में दोनों भ्रूण एक ही मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान नहीं बनते हैं। दोनों का साइकल अलग होता है। ट्विन्स के मामले में दोनों भ्रूण एक साथ परिपक्व होते हैं लेकिन सुपरफेटेशन में जो भ्रूण पहले कंसीव हुआ था। वह पहले परिपक्व होता है।
इंसानों में ऐसी स्थिति काफी दुर्लभ
एनिमल जेनेटिक्स के एक पेपर के अनुसार, यह घटना भेड़, मछलियों और गायों में आम है क्योंकि मादाएं कई नरों के साथ संभोग करती हैं और इससे उनके अलग-अलग संतान पैदा करने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन इंसानों में ऐसी स्थिति दुर्लभ ही देखने को मिलती है। दुनिया भर में इसके कुछ ही मामले सामने आए हैं।
बच्चों को जुड़वां माना जाता है
सुपरफेटेशन से पैदा हुए बच्चों को अक्सर जुड़वां माना जाता है क्योंकि वे एक ही दिन, एक ही जन्म के दौरान पैदा हो सकते हैं। लेकिन ये जुड़वा नहीं होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि जुड़वा बच्चों के 400 जोड़ों में से एक का जन्म हेटेरोपैटरनल सुपरफेकुंडेशन के जरिए हो सकता है। 2020 में हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन के केवल 19 मामले सामने आए थे। . अधिकांश मामले इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से गुजरने वाली महिलाओं में हुए हैं।
क्या सुपरफेटेशन के कोई कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं
सुपरफेटेशन का सबसे बड़ा कॉम्प्लिकेशन यह है कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे अलग-अलग चरणों में बढ़ रहे होंगे। जब एक बच्चा जन्म लेने के लिए तैयार होता है, तो हो सकता है कि दूसरा भ्रूण अभी तैयार न हो। छोटे बच्चे की प्री मेच्योर डिलीवरी के कई रिस्क हो सकते हैं।
सुपरफेटेशन बहुत दुर्लभ है, इस स्थिति से जुड़े कोई खास लक्षण नहीं हैं। सुपरफेटेशन का पता तब चलता है जब गर्भ में जुड़वां भ्रूण अलग-अलग दर से बढ़ रहे हों।
