दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जो काफी दर्दनाक और चौकानें वाले होते हैं। ऐसे में एक ऐसा ही मामला तेलंगाना से भी सामने आई है, जहां एक शख्स सरकार से मौत की भीख मांग रहा है ताकि वह इस नर्क से मुक्ति पा सके। बता दें कि उस शख्स को एक खतरनाक बीमारी है जिससे उसका शरीर एक लाश की तरह हो गया है और उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हैं। चलिए इसके बारे में जानते हैं।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि यह मामला तेलंगाना के नलगोंडा का है। जहां गोपाल नाम का एक शख्स रहता है, जिसकी उम्र 44 साल है। जो अपनी बीमारी की वजह से नाउम्मीदी और असहनीय पीड़ा से बेबस है और वो सरकार से इंजेक्शन लगाकर मौत की मांग कर रहा है। बता दें कि गोपाल 24 साल पहले ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। लेकिन समय के साथ उसके शरीर में कुछ बदलाव होने शुरू हुए, जिससे उसे शारीरिक कमजोरी महसूस होने लगी। जब ये परेशानी आगे चलकर बहुत ज्यादा बढ़ गई तो वो हैदराबाद के एक अस्पताल में अपनी मेडिकल जांच करवाई। डॉक्टरों ने बताया कि वह मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी से पीड़ित है जोकि एक बेहद दुर्लभ बीमारी है।
हाथ-पैरों ने काम करने बंद कर दिए
डॉक्टर ने बताया कि इस बीमारी से मरीज के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। यही नहीं हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। बता दें गोपाल के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ। उसका शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगा और उसके हाथ-पैरों ने काम करने बंद कर दिए। वहीं इस बीमारी की वजह से उसकी नौकरी चली गई और वह जिंदा लाश की तरह बिस्तर पर पड़ा रहता है। वह सिर्फ बोल सकता है।
बता दें कि उसकी देखरेख उसकी 75 साल की मां अंजम्मा करती हैं। अंजम्मा ने बताया कि घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है जिस वजह से वह अपने बेटे का अच्छे से ख्याल नहीं रख पातीं हैं। वहीं उसके पास इतने पैसे नहीं है कि वह अपने बेटे का इलाज करवा सके।
सरकार से इंजेक्शन लगाकर मौत की मांग
ऐसे में अब गोपाल ने सरकार से इंजेक्शन लगाकर मौत की मांग की है। साथ ही उसने कहा है कि सरकार उसे मौत दे दे या उसे इस नरक से बाहर निकालने के लिए बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करें। गोपाल ने बताया कि अब वो अपनी मौत के लिए जिला कलेक्टर और सीएम रेवंत रेड्डी को एक पत्र लिखेगा। जिसमें वह लिखेगा कि अगर वह मर जाता है तो उसके शरीर का इस्तेमाल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का इलाज खोजने के लिए किया जाए।
वहीं तेलंगाना में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के 6,000 मरीज हैं। ऐसे में गोपाल ने राज्य सरकार से यह भी अपील की है कि इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए एक केयरटेकर का प्रबंध करें। साथ ही राज्य में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों को केवल 4,000 रुपये दिव्यांगता पेंशन मिल रही है। वहीं आंध्र प्रदेश में इन मरीजों को 15,000 रुपये पेंशन मिल रही है। ऐसे में यहां भी ऐसी की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि इन मरीजों को मदद मिल सके।
क्या होता है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (एमडी) एक ऐसी दुर्लभ बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। एक समय बाद इस बीमारी की वजह से पेशेंट का अंग काम करना बंद कर देता है।
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण
थकान महसूस होना
निगलने में परेशानी होना
हृदय संबंधी समस्याएं होना
सांस लेने में परेशानी होना
दिमाग का काम न करना
चलने फिरने में दिक्कत आना
शरीर में बहुत ज्यादा दर्द महसूस होना
