हाल ही में, भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला सरसों का तेल, जो अपने विशेष स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है, को संयुक्त राज्य अमेरिका में बैन कर दिया गया है। इस निर्णय ने प्रवासी भारतीयों के बीच काफी चिंता पैदा कर दिया है, और इस लोकप्रिय खाना पकाने के तेल के आसपास सुरक्षा और नियामक मानकों के बारे में बहस छेड़ दी। बता दें कि सरसों का तेल नेचुरल ऑयल है जिसमें सेहत को हेल्दी रखने वाले जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें सैचुरेटेड फैट, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, ओमेगा-6 फैटी एसिड, पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड, फाइबर और अन्य माइक्रो-न्यूट्रीएंट्स उपलब्ध होते हैं। ये सभी पोषक तत्व सदियों से हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है।
इरुसिक एसिड से हार्ट डिसीज का खतरा
हालांकि, अपनी लोकप्रियता के बावजूद, सरसों का तेल अपने हाई इरुसिक एसिड तत्व के कारण जांच का विषय रहा है। इरुसिक एसिड, एक मोनोअनसैचुरेटेड ओमेगा-9 फैटी एसिड है, जिसे बड़ी मात्रा में सेवन करने से हेल्थ को नुकसान पहुंच सकती है। जानवरों पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि इरुसिक एसिड के अधिक सेवन से हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
अमेरिका में सरसों का तेल क्यों हुआ बैन
अमेरिका में फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक सरसों के तेल में इरुसिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, जोकि हेल्थ के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। बता दें इस एसिड का लंबे समय से तक सेवन करने से मेटाबॉलिज्म सही से काम नहीं कर पाता है। इतना ही नहीं यह ब्रेन की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे मेमोरी लॉस होने और मेंटल हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। यही वजह है कि अमेरिका, कनाडा और यूरोप में इसे बैन किया गया है।
