Zika virus cases: मौसम में गिरावट आने के साथ ही जिका वायरस के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसी में महाराष्ट्र में जीका वायरस के केसेस लगातार बढ़ रहे हैं। बता दें महाराष्ट्र में पिछले 15 दिनों में 8 मामले सामने आ चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इन बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर है। ऐसे में मंत्रालयकी तरफ से सभी राज्यों को एक सलाह जारी की गई है। सलाह में अत्यधिक सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। जीका वायरस का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं को भी है। इसे ध्यान में रखते हुए संभावित जीका संक्रमण के लिए गर्भवती महिलाओं की जांच करने के लिए विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
निर्देश जारी किये गये हैं
महाराष्ट्र में अब तक जिन मामलों की पुष्टि हुई है उनमें छह मामले पुणे से सामने आये हैं। बाकि के दो कोल्हापुर और संगमनेर से हैं। वहीँ स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक अतुल गोयल ने राज्यों को स्थिति पर बारीकी से नजर रखने का निर्देश जारी किया है।
गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता
एडीज मच्छरों द्वारा पनपने वाले जीका वायरस, गर्भवती महिलाओं को भी अपनी चपेट में के रहे हैं। जो चिंता का विषय है। यह खतरनाक वायरस संक्रमण नाल और गर्भनाल के माध्यम से भ्रूण तक आसानी से पहुंच सकता है। एडीज एजिप्टी डेंगू और चिकनगुनिया के प्रसार के लिए भी जिम्मेदार है।
वहीँ पुणे नगर निगम के सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजेश दिघे के अनुसार संक्रमण से माइक्रोसेफली हो सकता है। यह एक प्रकार का विकार है जिसमें नवजात शिशुओं में असामान्य रूप से छोटा सिर होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में जीका परीक्षण सुविधा उपलब्ध है और व्यापक निगरानी की जा रही है। दिघे के अनुसार पुणे से रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या बढ़ रही है।
डेंगू से कंजोर वायरस जिका
बता दें कई निजी अस्पताल भी एनआईवी से जुड़े हुए हैं और वे सीधे परीक्षण के लिए नमूने भेजते हैं। 20 जून से 4 जुलाई तक 21,441 मरीजों की जांच हो चुकी है। जीका डेंगू की तुलना में एक कमजोर वायरस है। लेकिन यह घातक हो सकता है। इसके लक्षण हल्के होते हैं और इसमें बुखार, दाने, सिरदर्द, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में दर्द शामिल हो सकते हैं।
इस बीमारी का अभी तक कोई इलाज नहीं है, लेकिन अगर मरीज भरपूर पानी पिए और आराम करे तो 4-5 दिनों में ठीक हो सकता है।
