पेट में ही शिशु की हत्या करना यानी अबॉर्शन करना कानूनी जुर्म हैं, लेकिन कई बार आपातकालीन स्थिति में मां का जीवन बचाने के लिए या गर्भ में ही शिशु को कोई जन्मजात बीमारी होने की वजह से उसका अबॉर्शन करना बेहद जरूरी हो जाता है। ऐसे में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है, जिसमें इडाहो राज्य के गर्भपात कानून पर विचार किया गया है। इस फैसले के तहत सुप्रीम कोर्ट ने अनियमितता कानून पर नकारात्मक फैसला दिया है, जिससे इडाहो में महिलाओं को आपात स्थिति में भी गर्भपात की अनुमति मिल सकेगी।
क्या है इडाहो राज्य के गर्भपात का कानून
इस निर्णय को जानने से पहले, हमें इडाहो राज्य के गर्भपात कानून के बारे में विस्तार से समझ लें। बता दें कि अब तक, इडाहो में गर्भपात सिर्फ उन मामलों में जायज था जहां मां की जानकारी और जीवन को खतरा हो, जैसे कि गर्भाशय में गंभीर बीमारी होने का खतरा। लेकिन इस नियम के तहत बहुत कम महिलाओं को ही गर्भपात के अधिकार मिल पाते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया गर्भपात का नया नियम
हालांकि, इस स्थिति पर अब सुप्रीम कोर्ट ने एक नया परिपत्र लिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इडाहो राज्य के गर्भपात कानून पर एकत्रित न्यायिक निर्णय दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि इस कानून में इंकंपैटिबिलिटी जो महिलाओं को उनके स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित करता है।
आपात स्थिति में महिला का हो सकता ही गर्भपात
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक सीमांत बैठकी द्वारा लिया गया है, जिसमें गर्भपात के अधिकार और नैतिकता के मामले पर गहरे विचार किए गए। अब से, इडाहो में महिलाओं को आपात स्थिति में भी गर्भपात की इजाजत मिल सकेगी। यह कानून स्वतंत्र और सुरक्षित गर्भपात के संदर्भ में एक नई स्थिति बनेगी।
इस निर्णय ने विभिन्न समाजी और राजनीतिक समूहों में भी गहरी चर्चाएं उत्पन्न की हैं। कई गर्भपात के पक्षपाती समूह इसे अपमानजनक मानते हैं, जबकि महिला संगठन और स्पीकर राइटस ने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना है।
