जरा सा बुखार होने पर हम में से बहुत से लोग बिना डॉक्टर को दिखाए पैरासिटामोल खा लेते हैं। लेकिन आपको बता दें हाल ही में दवा नियामक ने पाया है कि भारत में 50 जीवन रक्षक मेडिसिन जिनमें बुखार और दौरे को कण्ट्रोल करने के यूज़ होने वाली मेडिसिन काफी घटिया किस्म की हैं। वहीँ इनमे पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम, टेल्मिसर्टन एंटी-हाइपरटेंशन दवा, कफ़टिन कफ सिरप, क्लोनाज़ेपम गोलीयां, दर्द निवारक दवा डिक्लोफ़ेनाक, मल्टी-विटामिन और कैल्शियम टैब शामिल हैं।

मेहंदी की गुणवत्ता भी ख़राब

आपको बता दें दवा नियामक ने हिना मेहंदी को भी ख़राब बताया है जो ज्यादातर बालों और हाथों में लगाने के लिए यूज़ की जाती है। इसमें जो ब्रांडिंग की जा रही है वो भी गलत है। इतना ही नहीं देश में बने कफ सिरप के विदेशों में बच्चों की मौत से जुड़े होने के बाद भारत का दवा क्षेत्र जांच के घेरे में अ चूका है। बता दें केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दवाओं को लेकर एक चेतावनी दी है जिसमे दवाओं के नमूने वाघोडिया (गुजरात), सोलन (हिमाचल प्रदेश), जयपुर (राजस्थान), हरिद्वार (उत्तराखंड), अंबाला, इंदौर, हैदराबाद और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों से लिए गए थे।

इसमें पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम की गोलियां, जो घटिया पाई गई। ये मेडिसिन मध्य प्रदेश के उज्जन में स्थित एस्कॉन हेल्थकेयर द्वारा बनायी जाती है। फर्म ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दावा किया है कि वह फार्मास्युटिकल तैयार खुराक के रूप में निर्माण कर रही है। एस्कॉन हेल्थकेयर को भेजे गए फोन कॉल और ईमेल प्रश्नों का उत्तर नहीं फिलहाल नहीं मिला है।

सूची में ये मेडिसिन शामिल

बता दें डीसीजीआई ने सूजी जारी की है जिसमे कब्ज के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लैक्टुलोज सॉल्यूशन, एंटी-हाइपरटेंशन दवा टेल्मिसर्टन और एम्लोडिपिन आईपी टैबलेट, ऑटो-इम्यून बीमारियों और गंभीर संक्रमणों के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला डेक्सामेथासोन सोडियम फॉस्फेट इंजेक्शन आईपी और न्यूरोलॉजिकल प्रोब्लेम्स के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला क्लोनाज़ेपम टैबलेट आईपी 0.5 मिलीग्राम का नाम सूची में हैं।

फिलहाल इन सभी दवा के नमूनों की जांच केंद्रीय और राज्य दोनों लैब्स में भेजी गयी हैं। इससे पहले फरवरी में, भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) राजीव रघुवंशी ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दवाओं के रैंडम सैंपलिंग करके बाजार में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश भी दिया था।

नकली मेदिच्ने बनाने वालों पर नजर

इस पहल से नकली और घटिया दवाओं का मासिक डेटाबेस बनाने और निर्माताओं पर नज़र रखने में काफी मदद मिली है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अधिकारियों को देश में दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश भी जारी किया है।

By tnm

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