इन दिनों बहुत से लोगों के खानपीन और लाइफस्टाइल में काफी बदलाव आया है। यही वजह है कि लोग आज सेहत से जुड़ी समस्याओं से घिर रहे हैं। इन्हीं समस्याओं में से एक स्पाइन डिसीज यानी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी भी है। दरअसल गलत तरीके से उठने-बैठने, सोने-लेटने, और चलने फिरने से लोगों में स्पाइन डिसीज की समस्या बढ़ रही है। वहीं बहुत से लोग स्पाइन डिसीज से छुटकारा पाने के लिए सर्जरी का सहारा लेते हैं। लेकिन आज स्पाइन डिसीज रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है। बता दें कि अब सर्जरी के बिना ही सिर्फ इंजेक्शन तकनीक के माध्यम से लोगों का बेहतर तरीके से इलाज किया जा सकता है। जी हां अब स्पाइन डिसीज पेशेंट बिना सर्जरी करवाएं भी इंजेक्शन तकनीक से ठीक हो सकते हैं। बता दें कि यह इलाज प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन डॉ. प्रमोद पहारिया द्वारा मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में हो रहा है। चलिए इस इंजेक्शन तकनीक के बारे में जानते है।

इंजेक्शन तकनीक किस तरह से फायदेमंद

स्पाइन डिसीज के इलाज में सर्जरी के मुकाबले इंजेक्शन तकनीक काफी फायदेमंद है। दरअसल सर्जरी के दौरान पैरालिसिस, पैलाप्लेजिया, ब्लेंडर एवं बोवेल के कंट्रोल में क्षति, पैरों में कमजोरी, इंफेक्शन, इंप्लांट फैलियर जैसे कॉम्पिलकेशन देखने को मिलती है। लेकिन इंजेक्शन तकनीक ट्रीटमेंट से ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता है। वहीं मरीज को इस तकनीक से केवल एक बार ही इलाज करवाना पड़ता है, जिसके बाद पेशेंट बिल्कुल सही हो जाता है। इसके अलावा जो मरीज पहले से स्पाइन डिसीज की सर्जरी करवा चुके हैं, उन मरीजों में भी यह तकनीक कारगर है।

पेशेंट अपने घर कितने समय में जा सकता है

बता दें कि सर्जरी करवाने के बाद मरीज को कम से कम 3 महीने बाद अस्पताल से छुट्टी मिलती है लेकिन इस तकनीक में ऐसा कुछ नहीं है। आप इंजेक्शन लेने के एक घंटे बाद घर जा सकते है। वहीं इससे स्पाइन डिजीज का इलाज जड़ से होता है। साथ ही इससे 15 से 85 साल के मरीजों का इलाज किया जाता है।

7500 मरीज हुए ठीक

हालांकि इस इंजेक्शन तकनीक से अभी तक 7500 लोग बिल्कुल ठीक हो चुके हैं। वहीं यह मरीजों के इलाज में 90 से 95% सफल रहा है। अगर हम इस तकनीक में लगने वाले खर्च की बात करें तो यह मात्र 20000 रुपए में हो जाता है, जबकि सर्जरी के लिए 3 लाख से अधिक खर्च आता है।

किन लोगों का इस तकनीक से इलाज संभव

डिस्क प्रोलेप्स जैसे L4-L5, L5-S1, साइटिका, लंबर या सर्वाइकल रेडीक्युलोपैथी, डिजरनेरेटिव डिस्क, फैसिट जॉइन्ट सिंड्रोम, माइलोपैथी, लंबर कैनाल स्टेनोसिस, स्पॉन्डिलाइटिस आदि बीमारियों का इस तकनीक से इलाज किया जा सकता है। बता दें कि यह स्टेरॉइड इंजेक्शन नहीं है बल्कि यह एक सेफ अमेरिकन प्रोसीजर है, जो एक विशेष मशीन की निगरानी में किया जाता है।

By tnm

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