वायु प्रदूषण भारत के लिए एक गंभीर समस्या है। वहीं लगातार अधिकांश राज्य खास कर दिल्ली एनसीआर वायु प्रदूषण को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। वायु पॉल्यूशन से केवल सांस से जुड़ी समस्याएं ही नहीं होती बल्कि दिल दिमाग और फेफड़ों की सेहत पर भी खतरनाक प्रभाव पड़ता है। वायु पॉल्यूशन की वजह से दुनिया भर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिस वजह से लोगों में हार्ट अटैक के जोखिम बढ़ जाते हैं। दरअसल हाल ही में डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर की नवीनतम स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2024 रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वायु पॉल्यूशन से भारतीयों के दिल, दिमाग और फेफड़ों पर वायु प्रदूषण के विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। वहीं इस शोध का परिणाम नागरिकों, उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं को वायु गुणवत्ता में सुधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और उन्हें व्यक्तिगत उपाय करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देना है।
क्या पाया गया स्टडी में
हाल ही में डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर की नवीनतम स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2024 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीयों को वायु पॉल्यूशन से केवल सांस से जुड़ी प्रॉब्लम नहीं होती है बल्कि दिल, दिमाग और फेफड़ों को भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में, भारत में पुरानी श्वसन बीमारी के कारण 237,000 मौतें दर्ज की गईं। जो दुनिया भर में ओजोन से संबंधित साँस के कारण होने वाली मौतों का लगभग 50% है। वहीं फेफड़ों के कैंसर से होने वाली लगभग 5 में से 1 मौत की वजह पीएम का हाई लेवल सहित वायु प्रदूषण है। इतना ही नहीं 2021 में भारत में वायु प्रदूषण के कारण पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत की संख्या में वृद्धि हुई, जिससे उनकी श्वसन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा था।
शरीर में ऑक्सीजन की कमी से ह्रदय जोखिम अधिक
वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे लोगों में हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम होने के जोखिम बढ़ जाते हैं। दरअसल ph. 2.5 और घरेलू वायु प्रदूषण हृदय रोगों को काफी बढ़ाता है। एयर ph. 2.5 लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से सूरज की रोशनी में बदलाव, ऑक्सीडेटिव तनाव और ब्लड प्रेशर के कारण दिल के दौरे और स्ट्रोक की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बता दें कि भारत में होने वाले सभी मौतों में से 28% मौतें हृदय रोग के कारण होती हैं।
वायु प्रदूषण से मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचना
रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण से लोगों के मेंटल हेल्थ पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। नए शोध से पता चलता है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से संज्ञानात्मक गिरावट और अल्जाइमर जैसे मनोभ्रंश का खतरा बढ़ सकता है। वहीं शोधकर्ताओं का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य पर पूर्ण प्रभाव को समझने के लिए अभी और अध्ययन करने की जरूरत है।
डॉ. तनवीर बख्शी ने क्या बताया

डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर पंजाब ब्रांच के प्रधान डॉ. तनवीर बख्शी ने बताया कि यह प्रदूषित हवा लंबे समय से हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है। हमें हवा को साफ रखने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है ताकि भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
साथ ही उन्होंने स्वच्छ वायु नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, डॉक्टरों और नागरिकों से वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तत्काल और सामूहिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। सख्त उत्सर्जन मानकों को लागू करना, स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देना और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना प्रत्येक भारतीय के दिल, दिमाग और फेफड़ों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी साथ मिलकर इस वायु प्रदूषण संकट का मुकाबला कर सकते हैं और एक स्वस्थ, स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
