कहते हैं डॉ. और अस्पताल भगवान का ही रूप होते हैं, जहां मरीज को सही इलाज मिलता है। लेकिन अगर अस्पताल में मरीज को सही इलाज न मिले और उसे पैसों के लिए लूट लिया जाये तो मरीज इलाज कहां करवाएगा। कुछ ऐसा ही हुआ है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित मेदांता अस्पताल में। दरअसल एक मरीज ने इस अस्पताल के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिख कर शिकायत की है।

शिकायत में लिखा है कि एसिडिटी की समस्या से परेशान मरीज की जान को खतरा बताते हुए इलाज के लिए मेदांता अस्पताल ने आठ लाख रुपए मांगे और कहा कि वॉल्व में गड़बड़ी है इसे बदलना पड़ेगा। इसके बाद मरीज ने अपनी इस समस्या को एक निजी अपताल के डॉक्टर को भी दिखाया, जहां मात्र मरीज को 125 रुपए की दवाई दी गयी और वे दवाई से ठीक हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट
बता दे बीते महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक पत्र लिखा गया जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। पत्र में सुशांत गोल्फ सिटी के रहने वाले मरीज मोहन स्वरूप भरद्वाज जो 45 साल के हैं, उनके मुताबक उनकी तबियत 23 मई 2024 को ख़राब हो गयी थी। जल्दबाजी में उनके भाई और पत्नी उन्हें मेदांता अस्पताल ले गए और भर्ती कराया।
जहां पर अस्पताल में डॉ. महिम सरन और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवनीश ने उनकी एनजोग्राफी एवं अन्य जांचें करवाई। जांच के बाद उनके भाई और पत्नी से इलाज के लिए आठ लाख रुपए मांगे गये। डॉ. ने मरीज के हालत गंभीर बताते हुए कहा कि मरीज के हॉर्ट में वॉल्व डालना होगा। वहीँ अगर 30 मिनट के अंदर रुपए की व्यवस्था नहीं हुई तो मरीज की जान जा सकती है। उनके भाई और पत्नी के पास इतने पैसे नहीं थे जो तुरंत जमा करवाए जा सके और इलाज शुरू करवाया जाये।
स्टाफ ने की परिवार वालों से गाली-गलौज की
अस्पताल में मरीज के मित्र मनोज कुमार ने डॉक्टरों से कहा कि इन्हें हॉर्ट की कोई दिक्कत नहीं है। इन्हें पेट में गैस की समस्या है। वहीँ उन्होंने कहा कि हम ग्लोबल हॉस्पिटल में डॉ. दीपक अग्रवाल कमो एक बार दिखाना चाहते हैं। लेकिन मेदांता अस्पताल के दोनों डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने डिस्चार्ज करते समय बदतमीजी और गाली-गलौज की।
डॉ. में दी मात्र 125 रुपए की दवाई
मेदांता अस्पताल से किसी तरह से दिस्चारे करवाने के बाद ग्लोबल हॉस्पिटल डॉ. दीपक अग्रवाल को दिखाया गया तो उन्होंने मरीज को देखने के बाद मात्र 125 रुपए की दवा लिख दी और तीन इंजेक्शन दिए। दो घंटे के अंदर मरीज को आराम आ गया। और वो एकदम फिट होकर घर आ गया।
24 हजार हुए खर्च
बता दें इस पत्र में मोहन स्वरूप भरद्वाज ने ये भी लिखा है कि अगर मेदांता अस्पताल में उनके हॉर्ट में वॉल्व पड़ जाता तो उनकी जिंदगी और खराब हो जाती। इसीलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवदेन है कि हॉस्पिटल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और वहां खर्च हुए करीब 24 हजार रुपए वापस कराने की कृपा करें।
मेदांता अस्पताल का क्या है कहना
वहीं इस वायरल पत्र पर मेदांता अस्पताल ने सफाई पेश की और कहा कि मरीज मनगढ़ंत कहानी बना रहा है। उसके हॉर्ट में ब्लॉक था, लेकिन अब वह कह रहा है कि वह 125 रुपए में ठीक हो गया। हमारे पास मरीज की एनजोग्राफी सहित सारी रिपोर्ट मौजूद हैं। आप उसे देख सकते हैं। उन्होंने येभी कहा कि दवा से उसको तुरंत राहत मिल सकती हैं , लेकिन अगर बीमारी है तो उसका परमानेंट इलाज नहीं है।
