बहुत बार देखा जाता है कि डॉक्टर बनने के लिए स्टूडेंट को लैंग्वेज बैरियर का सामना करना होता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हिंदी मीडियम के बच्चे भी मेडिकल की पढ़ाई आसानी से हिंदी में ही कर सकेंगे। आपको बता दें दुनियाभर के कई देशों में डॉक्टरी की पढ़ाई अपनी मातृभाषा में करायी जाती है। जिसमें भारत का नाम भी शामिल है। भारत में सबसे पहले मध्य प्रदेश में राज्य सरकार की ओर से मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू की गयी थी। फिर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में शुरुआत की गयी। वहीँ अब बिहार मकी स्टूडेंट्स भी इसकाल लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है, जिन्हें इसकी जानकारी लेकर एक रिपोर्ट तैयारी करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल भेजा जाएगा। यह रिपोर्ट बिहार के स्वास्थ्य विभाग को जल्दी ही सौंपी जाएगी।
एमपी की तीन सदस्यीय टीम बिहार जाएगी
बता दें बीते मंगलवार विभाग की ओर से जारी एक अधिसूचना में एमपी भेजे जाने वाले टीम के सदस्यों में स्वास्थ्य समिति के मानव संसाधन प्रभारी राजेश कुमार, बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के एकेडमिक डीन डॉ. मिथिलेश प्रताप और पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) के क्लिनिकल पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र प्रसाद शामिल हैं।
किस तरह से होगी रिपोर्ट तैयार
बिहार से एमपी जाने वाली टीम वहां हिंदी मीडियम में हो रही मेडिकल की पढ़ाई के बारे में जानने की कोशिश करेंगे और शैक्षणिक कार्यों को समझेंगे। साथ ही हिंदी में एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को किस तरीके से तैयार किया गया है, यूज़ भी देखेंगे। हिंदी में ट्रांसलेट हुई एमबीबीएस की किताबें, सिलेबस, टीचर्स का पढ़ाने का तरीका, साइंस के जटिल विषयों को हिंदी में कैसे पढ़ाया जा रहा है आदि की एक डिटेल्ड जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रिपोर्ट तैयार करने के बाद क्या होगा
एमपी में एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में किस तरह से कराई जा रही है, इसकी एक डिटेल्ड रिपोर्ट बिहार के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को सौंपी दी जाएगी। इसी के आधार पर बिहार में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में कराने जाने को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार करने के बाद सिलेबस की रूपरेखा को अच्छे से समझ कर इसे लागू किए जाने को लेकर विचार-विमर्श किया जायेगा।
