आज कल के लाइफ स्टाइल से इंसानी शरीर में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में एक रिसर्च में आत सामने आई है कि रात की नींद में कमी आन कई तरह की बीमारियों को दावत देता है। कहने का मतलब यदि आप सही तरीके से अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो इससे आपकी हड्डियों पर असर पड़ता है। साथ ही हड्डियां चटकने भी शुरू हो जाती हैं। ये ज्यादातर उन लोगों के साथ होता है जो 50 पार कर चुकें हैं। ऐसे में ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
बोन डेंसिंटी योंग ऐज में होती है मजबूत
आपको बता दें इस स्टडी के मुताबिक ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के क्षणभंगुर होने के कई कारण हो सकते हैं। इसके लिए उम्र, हार्मोनल बदलाव, लाइफस्टाइल में परिवर्तन, कुछ बीमारियों आदि वजह भी हो सकती है। बता दें बोन मिनिरल डेंसिंटी यानी हड्डियों में मजबूती की सघनता 20 साल की उम्र तक सबसे बेहतरीन और एक्टिव होती है। वहीँ 40 साल तक की उम्र तक भी हड्डियों में मजबूती बनी रहती है। इसके बाद हड्डियाँ कुदरती तौर पर कमजोर होने लग जाती हैं। खासकर महिलाओं में इस उम्र के बाद मेनोपॉज होना शुरू हो जाता है। इसलिए महिलाओं में बोन डेंसिंटी इस उम्र में आते आते घटने लगती है। इसके बाद ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
नींद की कमी भी एक बढ़ी वजह
अध्ययन में सामने आया है कि समय के साथ सोने की आदत से लोगों की उम्र बढ़ती है, वहीँ जिन जो लोग बढती उम्र में होते हैं उनको नींद कम आती है। पहले जो व्यक्ति रात में 8 घंटे तक सोते रहते हैं, वही बाद में 5 से 6 घंटे तक सोने लगते हैं। लेकिन जीवनशैली में बदलाव के कारण शरीर का सार्केडियन रिद्म बिगड़ जाता है। यह पूरे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगता है। जो जीन किसी व्यक्ति के इंटरनल क्लॉक को कंट्रोल करता है वह हड्डियों की कोशिकाओं में भी होता है। जब ये कोशिकाएं हड्डियां बनाती है तब यह खून में कुछ अतिरिक्त कंपाउड भी छोड़ती है। सामान्य अवस्था में यह जीन नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन जब शरीर का रिद्म बिगड़ता है तो बोन का मेटाबोलिज्म भी बिगड़ने लगता है। इससे बोन की डेंसिटी तेजी से घटने लगती है। .
हड्डियों की मजबूती को कैसे बढ़ाएं
हड्डियों की मजबूती के लिए रोजाना एक्सरसाइज करना जरूरी है। इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना भी जरुरी है। ज्यादा तनाव लेने पर भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। खाने-पीने में रोजाना साबुत अनाज, हरी पत्तीदार सब्जी, दूध, दही, अंडा, ब्रोकली, कैबेज, ओकरा, मछली, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन करें।
