यूं तो गुटखा, पान मसाला, जर्दा या खैनी जैसे तंबाकू उत्पाद स्वास्थ्य के लिए कितना नुकसानदायक है यह तो सब जानते हैं। लेकिन इसके बावजूद लोग इसे बहुत शौक से खाते हैं। इसके पीछे कि वजह काफी हद तक जानी मानी हस्तियां द्वारा इनका प्रचार करना है। लेकिन हाल ही में ऑक्सफोर्ड एकेडमिक के निकोटीन एंड टोबैको रिसर्च जर्नल में पब्लिश हुई एक नए स्टडी में पता चला है कि भारत में गुटखा, पान मसाला, जर्दा या खैनी जैसे तंबाकू उत्पाद स्वास्थ्य के लिहाज से महंगा पड़ सकता है। इतना ही नहीं शोधकर्ताओं ने खासकर तीन देश भारत, बांगलादेश और पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी जारी की हैं।
इन देशों को शोधकर्ताओं ने क्या दी है चेतावनी
शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर सरकार तंबाकू उत्पाद को रोकने में नीतियों में बदलाव नहीं करते हैं तो भारत को स्वास्थ्य देखभाल पर करीब 158,705 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ेगा। पाकिस्तान पर करीब 25 हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा तो वहीं बांग्लादेश में यह आंकड़ा 12,530 करोड़ रुपए के आसपास रह सकता है। बता दें कि यह खबर भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और सेंटर फॉर हेल्थ इनोवेशन एंड पॉलिसी फाउंडेशन से जुड़े शोधकर्ताओं के सहयोग से किए स्टडी में सामने आई है। इस स्टडी में भारत के साथ-साथ, पाकिस्तान, बांग्लादेश, और यूके के अलग अलग संस्थानों से जुड़े शोधकर्ताओं ने भी भूमिका निभाई है।
क्या है स्टडी के परिणाम
बता दें कि इस स्टडी को करने के लिए शोधकर्ताओं ने वयस्क आबादी को 15-19 वर्ष से लेकर 70-74 तक के पांच-पांच वर्ष के आयु समूहों में बांटा है। इसके बाद उन्होंने उम्र, लिंग के आधार पर महिलाओं और परूषों को अलग किया। एक मॉडल का इस्तेमाल कर ये पाया कि हर साल कुछ लोग तंबाकू युक्त पदार्थों का सेवन बंद कर देंगे तो कुछ इसे जारी रखेंगे। वहीं कुछ लोग जिन्होंने इसका सेवन बंद कर दिया था वे इसे फिर से शुरू कर देंगे। हालांकि कुछ लोगों ने इसे पहली बार उपयोग करना शुरू करेंगे, वहीं इससे कुछ लोगों की मृत्यु भी होगी। स्टडी में यह भी पाया गया कि हर एक समूह के लोगों के जीवन में अलग-अलग समय पर कैंसर और स्ट्रोक कितने आम होंगे और इन बीमारियों के इलाज पर कितना खर्च आएगा।
धुआं रहित तंबाकू के उपयोग रोकने में बने नीतियाँ
इस स्टडी के जरिए शोधकर्ताओं ने अनुमाम लगाया कि अगर भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान, लोगों को धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करने से रोकने के लिए नीतियां बनाते हैं तो स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च होने वाली लागत में कितनी कटौती की जा सकेगी।
बीड़ी, सिगरेट के मुकाबले खैनी गुटखा सेफ
बता दें कि दक्षिण एशिया में खैनी, गुटखा, जर्दा और पान मसाला जैसे तंबाकू उत्पाद काफी लोकप्रिय है। इतना ही नहीं यहां करीब 30 करोड़ लोग इनका सेवन करते हैं। वहीं लोगों का मानना है कि ये बीड़ी, सिगरेट की तुलना में काफी हेल्थ के लिए काफी सुरक्षित है तो इसकी बढ़ोतरी में यह वजह प्रमुख है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि धुआं रहित तंबाकू के उपयोग से न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।
स्टडी में क्या पाया गया
स्टडी के मुताबिक सभी देशों में सेहत की देखभाल पर जो खर्च आएगी वो कम उम्र के लोगों के लिए सबसे ज्यादा हो सकती है। भारत में 35 से 39 आयु वर्ग के पुरुषों के स्वास्थ्य देखभाल पर सबसे ज्यादा खर्च आएगा। वहीं बांग्लादेश में यह 30 से 44 आयु वर्ग और पाकिस्तान में 20 से 24 और 30 से 34 आयु वर्ग के लोगों के लिए रहने की चिंता जताई है।
