दुनिया इस समय एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) के गंभीर संकट का सामना कर रही है, जिससे हर साल लगभग 50 लाख मौतें हो रही हैं। हालांकि खतरा सिर्फ बैक्टीरिया तक सीमित नहीं है। अब फंगल संक्रमण (Fungal Infections) भी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो रहे हैं, जिसे वैज्ञानिक मौन महामारी (Silent Epidemic) कह रहे हैं।
फंगल संक्रमण और दवा प्रतिरोध: बढ़ती चुनौती
वहीं मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के आणविक जीवविज्ञानी नॉर्मन वैन राइंन के मताबिक फंगल संक्रमण और एंटीफंगल प्रतिरोध को वैश्विक स्वास्थ्य चर्चाओं में अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने ने बताया कि यह एक तेजी से बढ़ती वैश्विक समस्या है जिसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
फंगल रोगों पर ध्यान न देने के परिणामस्वरूप, हर साल 6.5 मिलियन लोग फंगल संक्रमण से प्रभावित होते हैं और 3.8 मिलियन मौतों का सामना करते हैं। सबसे खतरनाक फंगल रोगजनकों में अस्परगिलस फ्यूमिगेटस और कैंडिडा शामिल हैं, जो कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों और बुजुर्गों को अधिक प्रभावित करते हैं।
फंगस का इलाज करना क्यों मुश्किल
फंगल संक्रमणों का इलाज करना इसलिए कठिन है क्योंकि फंगस की संरचना मानव कोशिकाओं से मिलती-जुलती होती है। इसका मतलब यह है कि ऐसी दवाएं विकसित करना मुश्किल है जो फंगस को नष्ट करें, लेकिन मानव कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचाएं। वर्तमान में सिर्फ चार प्रकार की एंटीफंगल दवाएं उपलब्ध हैं, और इनके प्रति प्रतिरोध तेजी से बढ़ रहा है, जिससे यह समस्या और खतरनाक बन गई है।
कृषि प्रथाओं का असर
वैन राइंन की टीम का मानना है कि कृषि में उपयोग किए जाने वाले फंगीसाइड्स भी इस समस्या को बढ़ावा दे सकते हैं। फसलों को फंगल संक्रमण से बचाने के लिए जो रसायन इस्तेमाल किए जाते हैं, वे मानवों में फंगल प्रतिरोध को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए दुनिया को फसलों की रक्षा और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
वैश्विक दृष्टिकोण की जरूरत
सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र द्वारा एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और फंगस के प्रतिरोध पर चर्चा होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बैठक में फंगल संक्रमण को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
