कैंसर से होने वाली मौतें हर साल लाखों लोगों की जान ले रही हैं। कैंसर पुरुषों और महिलाओं, सभी आयु वर्गों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। पुरुषों में लंग्स और मुंह के कैंसर के बाद सबसे अधिक मामले प्रोस्टेट कैंसर के होते हैं। आंकड़ों के अनुसार हर आठ में से एक पुरुष को प्रोस्टेट कैंसर का खतरा रहता है। आमतौर पर यह कैंसर 65 वर्ष की उम्र के बाद सामने आता है, लेकिन अब यह समस्या 60 की उम्र वालों में भी तेजी से फैल रही है।

साल 2020 में दुनियाभर में लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख) नए प्रोस्टेट कैंसर के मामले दर्ज किए गए और 375,000 मौतें हुईं। वहीं भारत में इस साल 34,540 प्रोस्टेट कैंसर के मामले और 16,783 मौतें दर्ज की गईं। पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का समय पर निदान न हो पाना एक गंभीर समस्या बन गया है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इस दिशा में अब एक बड़ा कदम उठा रहे हैं। शोधकर्ताओं ने एक नए प्रकार के स्क्रीनिंग टेस्ट पर काम करना शुरू किया है, जिससे प्रोस्टेट कैंसर का समय रहते पता लगाया जा सके और हजारों लोगों की जान बचाई जा सके।

प्रोस्टेट कैंसर और इसका खतरा

प्रोस्टेट कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि में कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होता है। यह ग्रंथि पुरुष प्रजनन प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। डीएनए में कुछ बदलाव को इस बीमारी का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा जिन पुरुषों के परिवार में किसी को पहले यह समस्या रही हो, उनमें भी इसका खतरा अधिक होता है। जीवनशैली में गड़बड़ी, मोटापा, और असंतुलित आहार भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टरों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बीमारी का समय रहते निदान नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से अधिकतर मामलों का पता अंतिम चरण में ही चलता है। प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण भी तब तक सामने नहीं आते, जब तक कैंसर गंभीर रूप से फैल नहीं जाता।

ट्रांसफॉर्म स्क्रीनिंग ट्रायल

प्रोस्टेट कैंसर के जल्द निदान के उद्देश्य से यूके में एक नया स्क्रीनिंग ट्रायल शुरू किया गया है, जिसे ‘ट्रांसफॉर्म’ नाम से जाना जाता है। प्रोस्टेट कैंसर यूके, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च समेत अन्य संस्थानों द्वारा इसे वित्त पोषित किया जा रहा है। इस टेस्ट के जरिए वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरणों में ही इसका पता लगाया जा सके, ताकि इसका सही समय पर इलाज किया जा सके।

विशेषज्ञों की राय

प्रोस्टेट कैंसर यूके के शोध निदेशक डॉ मैथ्यू हॉब्स ने कहा कि ट्रांसफॉर्म का उद्देश्य बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ने का सबसे प्रभावी और कम हानिकारक तरीका खोजना है। अभी तक, प्रोस्टेट कैंसर का पता रक्त में प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) नामक रसायन के जरिए लगाया जाता है, जो उच्च जोखिम वाले मामलों में बायोप्सी की सलाह देता है।

हालांकि रक्त में पीएसए का उच्च स्तर हमेशा प्रोस्टेट कैंसर का संकेत नहीं होता, और बायोप्सी एक खर्चीली और दर्दनाक प्रक्रिया है। इसलिए इस नए स्क्रीनिंग ट्रायल के जरिए जीन पैनल का उपयोग कर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी व्यक्ति में प्रोस्टेट कैंसर का कितना जोखिम हो सकता है।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में यूरोलॉजी की प्रमुख प्रोफेसर कैरोलीन मूर ने कहा कि प्रोस्टेट कैंसर के वैश्विक आंकड़े चिंताजनक हैं। उम्मीद है कि इस नए ट्रायल से कैंसर का जल्द पता लगाने और इलाज के नए रास्ते खुलेंगे।

By tnm

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