भारतीय-अमेरिकी मॉडल, राइटर, और टीवी पर्सनालिटी पद्मा लक्ष्मी ने हाल ही में अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्या ‘एंडोमेट्रियोसिस’ के बारे में खुलकर बात की है। पद्मा लक्ष्मी, जो 54 साल की हैं, फिल्म बूम में नजर आई थीं और एक बेस्ट-सेलिंग लेखिका भी हैं। उन्होंने बताया कि इस दर्दनाक बीमारी से वह कई वर्षों से जूझ रही हैं। हाल ही में बोस्टन में सिमंस लीडरशिप कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने भाषण में उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें 13 साल की उम्र में इस बीमारी के लक्षण दिखने लगे थे, लेकिन सही इलाज मिलने में उन्हें 36 साल की उम्र तक का इंतजार करना पड़ा।

कैसे एंडोमेट्रियोसिस ने प्रभावित किया लक्ष्मी का जीवन?

पद्मा लक्ष्मी ने बताया कि इस बीमारी के चलते उन्होंने कई नौकरियां खो दीं और कई परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बीमारी के चलते उन्हें भारी दर्द का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। लक्ष्मी के अनुभव ने उन महिलाओं के दर्द को उजागर किया है, जो एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं।

एंडोमेट्रियोसिस: एक गंभीर बीमारी

एंडोमेट्रियोसिस एक जटिल और दर्दनाक बीमारी है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग (एंडोमेट्रियम) गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती है। यह बीमारी महिलाओं में बांझपन (इनफर्टिलिटी) का एक प्रमुख कारण भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पूरी दुनिया में लगभग 10.9 मिलियन महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से शहरी महिलाओं में अधिक पाई जाती है, और समय पर इलाज न मिलने पर यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

क्या है एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण

पेट और कमर में दर्द

यह बीमारी नाभि के नीचे पेट और कमर में लगातार दर्द का कारण बनती है, खासकर पीरियड्स के दौरान।

पीरियड्स के दौरान दर्द

पीरियड्स के समय अत्यधिक दर्द होना, जिसे डाइस्मेनोरिया कहा जाता है, एंडोमेट्रियोसिस का एक सामान्य लक्षण है।

ओव्यूलेशन के दौरान दर्द

जब अंडाणु ओवरीज से फेलोपियन ट्यूब में आता है, तो इस दौरान भी महिलाओं को काफी दर्द महसूस होता है।

यौन संबंध के समय दर्द

इस बीमारी से पीड़ित महिलाएं यौन संबंध के दौरान असहनीय दर्द का सामना करती हैं, जिससे उनकी निजी जिंदगी भी प्रभावित होती है।

थकान और कमजोरी

एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं को अक्सर अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है।

बांझपन

इस बीमारी के कारण गर्भधारण में भी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिससे महिलाओं को गर्भवती होने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

एंडोमेट्रियोसिस का इलाज

इस बीमारी का इलाज दो तरीकों से किया जा सकता है: दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव के जरिए। शुरुआती स्थिति में दवाइयां काफी प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टरी सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। नियमित रूप से डॉक्टरी परामर्श और स्वस्थ जीवनशैली का पालन करके इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस से बचाव के उपाय

नियमित व्यायाम

नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है और हार्मोनल संतुलन भी सही रहता है, जिससे इस बीमारी की संभावना कम हो जाती है।

स्वस्थ आहार का पालन

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर और एंटीऑक्सिडेंट युक्त आहार का सेवन करके शरीर को अंदर से मजबूत बनाया जा सकता है। फल, सब्जियां, और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन फायदेमंद होता है।

बॉडी को हाइड्रेट रखें

शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी बनाए रखना जरूरी है, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते रहते हैं और स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

By tnm

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