हमारे शास्त्रों में बहुत सी चीजों का उल्लेख किया गया है। किसी भी प्रकार की जानकारी आपको शास्त्रों में मिल जाएगी। शास्त्र बहुत सी तरह के हैं, जिनमें से कुछ इस तरह हैं, न्याय शास्त्र, योग शास्त्र, सांख्य शास्त्र, वेदांत शास्त्र, मीमांसा शास्त्र, वैशेषिक शास्त्र आदि। इस शास्त्रों में अलग अलग तरह की जानकारी है। चाहे मनुष्य के शरीर के बार में हो या दुनिया के बार में। इनमें आपको हर एक चीज का जवाब मिल जाएगा। ऐसे ही हमारे वेदों और शास्त्रों में आयुर्वेद के बारे में भी बहुत सी जानकारियां दी हुई हैं। धन्वंतरि आयुर्वेद में रोगी देखभाल से भी आगे की खोज की गई है।
Dhanvantari कौन हैं?

धन्वंतरि को देवताओं के चिकित्सक के रूप में जाना जाता है। कई ग्रंथों के हिसाब से इन्हें भगवान विष्णु का ही रूप माना गया है। यह भगवान विष्णु का सांसारिक रूप है, जिन्हें रक्षक के रूप में भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय ऋषि धन्वंतरि पवित्र अमृत को लेकर प्रकट हुए थे, तब देवताओं और असुरों के बीच अमृत को लेकर जंग शुरू हो गई थी। आयुर्वेद की उत्पत्ति में धन्वंतरि का अहम हिस्सा है।
धन्वंतरि की विशेषज्ञता शल्य चिकित्सा या सर्जरी थी। सुश्रुत को उनके सबसे प्रसिद्ध शिष्यों में से एक जाना गया है। माना जाता है कि आयुर्वेद को आठ हिस्सों में उन्होंने ही बांटा था। इसमें शल्य, काया चिकित्सा, शालक्य, कौमारभृत्य, भूतविद्या अगदतंत्र, रसायनतंत्र और वाजीकरणतंत्र शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार अपने अवतार के दौरान, भगवान विष्णु ने काशी के राजा के रूप में शासन किया, जिसे आजकल वाराणसी के नाम से जाना जाता है। विष्णु पुराण में धन्वंतरि को काशी के पौराणिक राजा दिवोदास के परदादा के रूप में भी माना गया है। धन्वंतरि को एक सुंदर व्यक्ति के रूप में पेश किया जाता है। उनके अक्सर चार हाथ दिखाए जाते हैं। एक हाथ में उन्होंने अमृत, एक में शंख, एक में चक्र और एक में जोंक (प्राणी) पकड़ा हुआ है। जो पुराने समय में रक्तपात की ऐतिहासिक प्रथा का प्रतीक था। दूसरे ग्रंथों में उन्हें शंख, अमृत, जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद की पुस्तक के साथ दर्शाया गया है।
धन्वंतरि-निघंटु
बता दें कि पुराणिक कथाओं के हिसाब से धन्वंतरि ने आयुर्वेद की प्रथा को बढ़ावा दिया है। एक विषेश ग्रंथ है, जिसमें धन्वंतरि के औषधीय पौधों को पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है। उस ग्रंथ को धन्वंतरि-निघंटु कहा गया है। ऋषि भारद्वाज द्वारा उन्हें आयुर्वेद के चिकित्सीय अभ्यास के बार में जानकारी मिली और उन्होंने शिक्षा हासिल की।
मंदिर

बाकी देवताओं की तरह यह भी प्रचलित हैं, लेकिन इनके मंदिरों की गिनती ज्यादा नहीं है। बता दें कि महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के दापोली में एक धन्वंतरि मंदिर स्थित है। मंदिर डोंगरे परिवार से संबंधित है और वैद्य अनिरुद्ध डोंगरे संचालक हैं। दक्षिण भारत में भी इनके मंदिर हैं, खासकर केरल और तमिलनाडु में। थोट्टुवा धन्वंतरि मंदिर, जोकि केरल में विशेष रूप से प्रसिद्ध मंदिर है। यहां भगवान धन्वंतरि की मूर्ति छ: फीट ऊँची है और पूर्व की ओर मुंह करके खड़ी है। तमिलनाडु में भी प्रसिद्ध मंदिर श्री रंगनाथस्वामी मंदिर (श्रीरंगम) के प्रांगण में एक धन्वंतरि मंदिर है। नेपाल में भी प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के पास धन्वंतरि को समर्पित एक शिकार शैली का मंदिर है।
इन बीमारियों से मिलता है निजात
धन्वंतरि आयुर्वेद के बहुत से फायदे हैं। यह महिला और पुरुष के बांझपन का उपचार करता है। धन्वंतरि आयुर्वेद में महिला के बांझपन के लिए पंचकर्म उपचारों और मौखिक हर्बल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। यह इतना आधुनिक है कि इसमें आईवीएफ़ विफलताओं संबंधी भी मदद की जाती हैं। बांझपन के लिए ट्यूबल ब्लॉकेज, पीसीओडी, एंडोमेट्रियोसिस, खराब एंडोमेट्रियल रिसेप्टिविटी जैसे मामलों में मदद मिलती है।
बांझपन के सभी मापदंडों को नजर में रखते हुए ही डॉक्टर प्रजनन प्रणाली का कायाकल्प करते हैं।
