अगर आप भी बिना आराम किये लगातार ऑफिस में काम करते हैं तो सावधान हो जाएं। दरअसल हाल ही में चीन के एक प्राइवेट कंपनी में A’bao नाम का एक कर्मचारी 104 दिन तक लगातार काम किया, बिना किसी छुट्टी के। उसकी ऑर्गन फेलियर (अंग विफलता) के कारण मौत हो गई। वहीं मृतक के परिवार ने कंपनी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अत्यधिक काम और उचित स्वास्थ्य देखभाल की कमी के कारण A’bao की मौत हुई।
लगातार काम करने से बिगड़ी हालत
A’bao फरवरी से मई 2023 तक एक पेंटर के रूप में काम कर रहा था। कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि इस अवधि में उसे लगातार काम करने के लिए मजबूर किया गया। जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो उसने 25 मई को केवल एक दिन की छुट्टी ली। इसके बाद 28 मई को उसकी हालत और खराब हो गई, और 1 जून 2023 को उसकी मृत्यु हो गई। परिवार ने याचिका में बताया कि अगर उसे पर्याप्त छुट्टी दी जाती और स्वास्थ्य देखभाल मिलती, तो उसकी जान बच सकती थी।
कंपनी का तर्क: पहले से थी बीमारी
कंपनी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए यह दलील दी कि A’bao को जो काम सौंपा गया था, वह उसके काबिलियत के हिसाब से था। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि कर्मचारी पहले से ही बीमार था और समय पर इलाज न लेने के कारण उसकी मौत हुई है। उनका दावा था कि कंपनी की ओर से काम के बोझ या किसी अन्य कारण से उसकी मौत नहीं हुई। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने जितना भी काम दिया, वह मैनेज किया जा सकता था।
कोर्ट का निर्णय: कंपनी को दोषी ठहराया
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और इस मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने दिन में 8 घंटे और हफ्ते में 44 घंटे के काम के नियमों का उल्लंघन करने को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने यह पाया कि कंपनी ने A’bao को अत्यधिक काम करने के लिए मजबूर किया, जिससे उसकी स्वास्थ्य स्थिति और खराब हो गई। इसके बाद कोर्ट ने कंपनी को मृतक के परिजनों को 47.46 लाख रुपये हर्जाने के रूप में देने का आदेश दिया। इसके अलावा कोर्ट ने मानसिक आघात के लिए परिवार को 1.18 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजे के रूप में देने का निर्देश भी दिया।
कंपनी ने निचली अदालत के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन उच्च अदालत ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और कंपनी की अपील को खारिज कर दिया।
सोशल मीडिया पर बहस
इस घटना के बाद चीन में सोशल मीडिया पर कार्य के अत्यधिक घंटे और कड़े नियमों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। लोगों का कहना है कि कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है और यह कंपनियों को इस बात का संदेश देता है कि कर्मचारियों की सेहत और जीवन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस घटना ने यह दिखाया कि कैसे कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों की सेहत और जीवन को नजरअंदाज कर रही हैं, और उन्हें केवल मुनाफे का साधन बना रही हैं।
कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि अगर A’bao को समय पर छुट्टी दी जाती और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जाती, तो क्या उसकी जान बचाई जा सकती थी।
