आज के समय में बड़े लोग ही नहीं, बच्चे भी स्क्रीन पर घंटो समय बिताते हैं। स्क्रीन पर ज्यादा टाइम बिताने से बच्चों में कई हेल्थ प्रॉब्लम होने का जोखिम भी बढ़ रहा है। इन समस्याओं को देखते हुए स्वीडन में अब दो साल से कम उम्र के बच्चों को टीवी, मोबाइल और अन्य किसी भी प्रकार की स्क्रीन के उपयोग से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह सख्त कदम बच्चों की सेहत पर स्क्रीन के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए उठाया गया है। स्वीडन सरकार द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि इस उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की डिजिटल स्क्रीन से दूर रखा जाना चाहिए, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

स्क्रीन टाइम के लिए नई सीमाएं तय की गईं

स्वीडन के इन निर्देशों के अनुसार न केवल छोटे बच्चों बल्कि किशोरों तक के स्क्रीन उपयोग के घंटे भी सीमित किए गए हैं। 2 से 5 साल तक के बच्चों को दिन में केवल एक घंटा ही स्क्रीन टाइम की अनुमति दी गई है। वहीं, 6 से 12 साल के बच्चों के लिए यह सीमा 2 घंटे तक रखी गई है, जबकि किशोरों को दिन में अधिकतम 3 घंटे तक ही स्क्रीन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। यह कदम बच्चों के बीच मोबाइल फोन, टीवी और टैबलेट जैसी डिजिटल डिवाइसों के बढ़ते उपयोग पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।

फ्रांस, आयरलैंड और अमेरिका ने भी जारी किए दिशानिर्देश

स्वीडन के साथ-साथ फ्रांस और आयरलैंड जैसे देशों ने भी बच्चों में स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण लगाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। फ्रांस ने 3 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखने का परामर्श दिया है। यह दिशा-निर्देश एक रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अप्रैल में जारी किया था। इस रिपोर्ट के मुताबिक छोटे बच्चों के मस्तिष्क और मानसिक विकास पर स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग का बुरा असर पड़ता है। आयरलैंड और अमेरिका में भी बच्चों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं।

वीडियो कॉल्स के लिए अनुमति, परंतु सीमित उपयोग

हालांकि आयरलैंड और अमेरिका में यह छूट दी गई है कि छोटे बच्चे केवल वीडियो कॉल्स के दौरान परिवार और दोस्तों के साथ संवाद कर सकते हैं। इसके अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और स्वीडन जैसे देशों ने इस प्रकार की छूट के बजाय सख्त नियम लागू किए हैं। इन देशों में हाल ही में सामने आए शोध और अध्ययनों के आधार पर बच्चों पर स्क्रीन के दुष्प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। इन अध्ययनों के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन समय बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा डाल सकता है, जिससे उनकी सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का बढ़ता कदम

स्वीडन और अन्य देशों के यह कदम स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बच्चों में स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से बचाव करने के प्रयासों का हिस्सा है। इन नीतियों का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल उपकरणों से दूर रखकर उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत को बेहतर बनाना है।

By tnm

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