कर्नाटक में डेंगू का प्रकोप एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। बीते आठ वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए, राज्य में डेंगू के मामलों की संख्या 25,261 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह संख्या सितंबर 2024 की शुरुआत तक की है, और यह लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष डेंगू के मामलों की संख्या ने पिछले सभी वर्षों को पीछे छोड़ दिया है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है।
रिकॉर्ड तोड़ने वाला वर्ष
कर्नाटक में डेंगू के मामलों में इस साल असाधारण वृद्धि देखी गई है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस वर्ष डेंगू के मामले काफी अधिक हैं। उदाहरण के लिए 2023 में कुल 19,300 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2019 में 18,183 और 2017 में 17,844 मामले सामने आए थे। इस वर्ष 2024 में 1 सितंबर तक 25,261 मामले सामने आए हैं, जो कि एक चिंताजनक स्थिति का संकेत है।
मरीजों की संख्या और स्वास्थ्य सेवा की स्थिति
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुल 25,261 मामलों में से 23,721 मरीज अब तक स्वस्थ हो चुके हैं, जो कि लगभग 94% की रिकवरी दर को दर्शाता है। हालांकि इस वर्ष डेंगू के कारण राज्य में 12 मौतें भी हुई हैं, जो इस रोग की गंभीरता को दर्शाता है। राज्य में अभी भी 1,528 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से 197 मरीज अस्पतालों में उपचाराधीन हैं और छह मरीजों की हालत गंभीर है, जिनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।
बीबीएमपी क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप
बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) क्षेत्र डेंगू के मामलों में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। बीते एक दिन में ही राज्य में 221 नए मामले सामने आए, जिनमें से 94 मामले बीबीएमपी क्षेत्र से थे। इसके अलावा 52 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा, जिससे अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ रहा है। बीबीएमपी क्षेत्र में अब तक डेंगू के कारण तीन मौतें हो चुकी हैं, जबकि शिवमोग्गा और हासन में दो-दो मौतें दर्ज की गई हैं।
डेंगू के शिकार आयु वर्ग और क्षेत्रीय प्रभाव
डेंगू से प्रभावित मरीजों में अधिकांश संख्या वयस्कों की है। 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 15,735 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 1-18 वर्ष के आयु वर्ग में 9,020 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 0-1 वर्ष के शिशुओं में 506 मामले दर्ज किए गए हैं, जो कि इस रोग की व्यापकता और सभी आयु वर्गों में इसके प्रसार को दर्शाता है।
क्षेत्रीय स्तर पर, बीबीएमपी, शिवमोग्गा, हासन, धारवाड़, दावणगेरे, हावेरी और मैसूरु जिलों में डेंगू का प्रभाव सबसे अधिक देखा गया है। इन जिलों में कुल 12 मौतें दर्ज की गई हैं, जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता पर सवाल उठते हैं।
डेंगू की बढ़ती संख्या: एक राष्ट्रीय चिंता
डेंगू की इस बढ़ती संख्या के मद्देनजर, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) ने राज्य सरकार को सतर्क रहने और आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। इस महामारी से निपटने के लिए सरकार ने स्वच्छता अभियान, मच्छर निरोधक उपायों और सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रमों को तेज कर दिया है। लेकिन इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि डेंगू के प्रसार को रोका जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
