भारत सरकार अंग दान और प्रत्यारोपण के लिए एक देश-एक नीति लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार विभिन्न राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर रही है। यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब देश में अंग दान की अत्यधिक आवश्यकता महसूस की जा रही है, और इसका उद्देश्य अंग विफलता से पीड़ित रोगियों को नया जीवन देने के लिए अंग दान को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है।
कार्यक्रम के दौरान इस पहल की मिली जानकारी
स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एलएस चांगसन ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान इस महत्त्वपूर्ण पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अंग दान को जीवन का एक तरीका बनाना आवश्यक है, ताकि इससे उन लोगों को जीवनदान मिल सके, जो अंग विफलता जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। चांगसन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने मन की बात कार्यक्रम में अंग दान के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि एक मृत व्यक्ति के अंग दान से आठ रोगियों को नया जीवन मिल सकता है।
अंग दान के प्रति जागरूकता होना जरुरी
एलएस चांगसन ने आगे बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय देश के सरकारी संस्थानों में अंग प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ को उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है। इसके साथ ही अंग दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक व्यापक जन जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। चांगसन ने यह भी कहा कि अंग दान के प्रति जागरूकता पैदा करना और इसे जीवन का हिस्सा बनाना अत्यधिक महत्वपूर्ण है, ताकि समाज में अंग दान को सामान्य रूप से स्वीकार किया जा सके।
डीजीएचएस ने भी इसे लेकर शेयर किये विचार
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. अतुल गोयल ने भी इस कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए। उन्होंने राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसने भारत में अंग और ऊतक प्रत्यारोपण क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका निभाई है। डॉ. गोयल ने कहा कि भारत में दान देने की परंपरा हमेशा से रही है, और इसे और अधिक मजबूत करने के लिए हमें सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में मृतक के अंग दान को प्रोत्साहित करना चाहिए।
डॉ. गोयल ने यह भी बताया कि भारत में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में बेहतर सुधार के लिए NOTTO के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि अंग दान और प्रत्यारोपण के लिए मौजूदा कानूनी ढांचा और भी सुदृढ़ हो सके। इस दिशा में विधायी सुधारों की आवश्यकता है, ताकि अंग दान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित हो सके।
दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन
इस अवसर पर दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें अंग दान और प्रत्यारोपण से संबंधित दस महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। शिविर का उद्देश्य अंग और ऊतक दान और प्रत्यारोपण को बढ़ाने के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार करना है, ताकि अंग दान के लिए एक सुसंगत और प्रभावी नीति बनाई जा सके। इसके अलावा, शिविर के माध्यम से अंग दान और प्रत्यारोपण से संबंधित मौजूदा कानूनी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विधायी सुधारों पर सिफारिशें प्रस्तावित की जाएंगी।
इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच विचार-विमर्श से यह उम्मीद की जा रही है कि अंग दान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार होंगे, जिससे न केवल अंग विफलता से पीड़ित मरीजों की संख्या में कमी आएगी, बल्कि अंग दान के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी। यह शिविर भारत में अंग दान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिससे लाखों लोगों को नया जीवन मिल सकेगा।
