यूं तो माता-पिता अपने बच्चों की खुशी के लिए किसी भी हद तक जा सकते है, यह तो हम सब जानते हैं। कई बार पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो काफी चौकानें वाला होता है। दरअसल हाल ही में एक ऐसा ही मामला मुंबई से सामने आया है। जहां पवई में रहने वाला वाघमारे परिवार एक असाधारण संघर्ष से गुजरा है, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। चार सदस्यीय इस परिवार के पास अब सिर्फ एक-एक किडनी है, लेकिन इसके पीछे की कहानी इंसानियत, त्याग और सहयोग की मिसाल है।
बच्चों की जान बचाने के लिए दिया किडनी दान
वाघमारे परिवार में दीपक वाघमारे और उनकी पत्नी पल्लवी के दो बच्चे हैं, शोभा और अनिकेत। यह परिवार मिराज में लेमन सोडा ड्रिंक यूनिट चलाता था, लेकिन दो साल पहले उनकी बेटी शोभा अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई। वजन तेजी से घटने और बुखार का इलाज करने के बावजूद उसकी हालत बिगड़ती गई। जांच में पता चला कि उसकी किडनी फेल हो चुकी है, जो एक जेनेटिक समस्या थी।
मुंबई का योगदान: मदद के लिए बढ़े हाथ
समय पर इलाज के लिए वाघमारे परिवार ने चर्च की सहायता ली, जिससे वे बोरिवली स्थित न्यू लाइफ मेडिकल एंड एजुकेशनल फाउंडेशन के ट्रस्टियों तक पहुंचे। फाउंडेशन ने परिवार की मदद का फैसला लिया और उन्हें मुंबई लाया गया। नानावटी अस्पताल में शोभा का इलाज शुरू हुआ, लेकिन उसे बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत थी।
ऐसे में शोभा के पिता दीपक ने अपनी एक किडनी बेटी को दान कर दी, जिससे उसका ट्रांसप्लांट सफल रहा। लेकिन इसके बाद बेटे अनिकेत की हालत भी बिगड़ने लगी और उसकी किडनी भी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ गई। अनिकेत का ब्लड ग्रुप O था जबकि उसकी मां का B, जिससे सही डोनर मिलना मुश्किल हो गया।
नर्स ने दिखाई इंसानियत, बच्चे को दी किडनी
कई महीनों की कोशिशों के बाद एक नर्स जो अपने पति को किडनी देने वाली थी, ने अनिकेत की जान बचाने का फैसला किया। उसने अनिकेत को किडनी दी जबकि अनिकेत की मां पल्लवी ने नर्स के पति को अपनी किडनी दान की। इस अद्भुत सामंजस्य और त्याग ने अनिकेत का जीवन बचा लिया।
सहयोग से लौटी परिवार की खुशियां
इस पूरे संघर्ष में न्यू लाइफ फाउंडेशन ने 9 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी, जिसमें 4 लाख रुपये शोभा के इलाज और 5 लाख रुपये अनिकेत के ट्रांसप्लांट के लिए दिए गए। बाकी रकम एनजीओ और डोनेशन के जरिए जुटाई गई। वहीं मुंबई के इस मिडिल क्लास परिवार के लिए शहर के लोगों का सहयोग वरदान साबित हुआ। नानावटी अस्पताल के डॉक्टरों, चर्च, एनजीओ, और अनगिनत अनजान लोगों की मदद से वाघमारे परिवार की खुशियां वापस लौट आई हैं। अब पूरा परिवार एक-एक किडनी के साथ स्वस्थ जीवन जीने की उम्मीद कर रहा है।
