अफ्रीका में एमपॉक्स (मंकीपॉक्स) वायरस का नया वैरिएंट तेजी से फैल रहा है, जिससे कांगो सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। एमपॉक्स के इस नए वैरिएंट की मृत्यु दर करीब 3-4% है। कांगो में इसके संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे पूरे अफ्रीका में चिंता बढ़ गई है।
15 साल से कम उम्र के बच्चे ज्यादा प्रभावित
अफ्रीका के 13 देशों में एमपॉक्स का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसमें से 96% से अधिक मामले केवल कांगो में ही सामने आए हैं। अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार अब तक 14,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। खासकर 15 साल से कम उम्र के बच्चे इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो लगभग 85% मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।
4 मिलियन टीकों की मांग
इस प्रकोप को रोकने के लिए कांगो सरकार ने 4 मिलियन टीकों की मांग की है। इन टीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया जाएगा। कांगो के अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका और जापान ने टीके देने की सहमति जताई है।
WHO ने एमपॉक्स को लेकर जताई चिंता
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने भी एमपॉक्स के लगातार फैलाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह वायरस न केवल कांगो बल्कि अन्य अफ्रीकी देशों के लिए भी गंभीर खतरा है। इस स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की जरूरत है।
एमपॉक्स का प्रभाव
2022 में भी एमपॉक्स ने 70 से अधिक देशों में प्रकोप फैलाया था, लेकिन उस समय इसकी मृत्यु दर 1% से भी कम थी। लेकिन इस बार कांगो से फैले नए वैरिएंट की स्थिति अधिक गंभीर है। अफ्रीका CDC ने कहा कि अगर इसे जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर और भी देशों पर पड़ सकता है।
हालांकि इस समय अफ्रीका में एमपॉक्स के लिए सीमित मात्रा में ही टीके उपलब्ध हैं, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मदद और सही कदम उठाए जाने की सख्त जरूरत है ताकि इस वायरस के प्रसार को रोका जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
