अगर आपको भी बाहर किसी से भी बात करने में दिक्कत है या फिर कोई भी काम करने में परेशानी है। तो आप अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर की चपेट में हो सकते हैं। दरअसल हाल ही में कश्मीर के मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान और जीएमसी श्रीनगर की तरफ से एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि कश्मीर में बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर 7-10 प्रतिशत बढ़ा है। आपको बता दें एडीएचडी एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है जो बहुत एक्टिव और असावधानी से चिह्नित होता है। आमतौर पर 12 साल की उम्र से पहले ये उभरता है।

208 प्रतिभागियों का डाटा इकट्टा

अधिकारियों ने बताया कि आईएमएचएएनएस-के के चाइल्ड गाइडेंस एंड वेलबीइंग सेंटर में मार्च 2021 से फरवरी 2022 तक 12 महीनों का अध्ययन किया गया जिसमे एडीएचडी से पीड़ित 6-16 वर्ष की आयु के बच्चे पाए गये। जिनकी बच्चों सामाजिक और क्लिनिकल ​​​​प्रोफाइल की जांच की गई। इसमें 208 प्रतिभागियों से डेटा एकत्र किया गया था। वहीँ इस अध्ययन में कहा गया कि  एडीएचडी का प्रचलन उम्र के साथ कम होता जाता है। जीएमसी श्रीनगर के जर्नल ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि ऐसे प्रयास प्रभावित व्यक्तियों के लिए अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) प्रबंधन और परिणामों को अनुकूलित कर सकते हैं।

एडीएचडी क्या है

एडीएचडी एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है जो मस्तिष्क के कार्यकारी कार्य को प्रभावित करता है। इसमें व्यक्ति को अपने ही काम करने में दिक्कत होती है। साथ ही कीस भी चीज पर ध्यान केन्द्रित नहीं होता है।  इतना ही नहीं कार्यों को व्यवस्थित करने में भी कठिनाई होती है। यह एक लॉन्ग टर्म कंडीशन है। जिसका असर व्यक्ति दैनिक जीवन पर असर डालती है।

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के लक्षण

असावधानी या लापरवाही – ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना

अतिसक्रियता – बेचैनी महसूस होना और स्थिर बैठने में मुश्किल होना

आवेग – नतीजे के बारे में पहले सोचे बिना चीजें कहना या करना शामिल है।

By tnm

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