आज कल काम के कारण काफी तनाव लोगों को घेर रहा है। ऐसे में लोगों की मेंटल हेल्थ काफी प्रभावित होती है। इतना ही नहीं बहुत से लोगों पर इसका काफी ज्यादा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इससे निकलने के लिए बहुत से लोग कई तरह की मेंटल हेल्थ से जुडी थेरेपी का सहारा लेते हैं। इसी कड़ी में एक थेरेपी और जुड़ गयी है जिसका नाम Cognitive Behavioral Therapy है। इस थेरेपी का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का कारण बनने वाली सोच और व्यवहार के पैटर्न को बदलना है।
1960 में विकसित हुई थी ये थेरेपी
आपको बता दें सीबीटी इस बात पर आधारित है कि हमारे विचार, भावनाएं और व्यवहार आपस में जुड़े हुए हैं और नकारात्मक विचारों और व्यवहारों को बदलने से मूड में सुधार हो सकता है। वहीँ ये थेरेपी साल 1960 में अमेरिकी मनोचिकित्सक आरोन बेक द्वारा विकसित की गई थी। तभी से इस थेरेपी के जरिए अवसाद ग्रस्त लोगों का इलाज किया जा रहा है।
सीबीटी के प्रकार
संज्ञानात्मक चिकित्सा
यह थेरेपी गलत सोच पैटर्न की पहचान करने में सक्षम है और उसे बदलने पर फोकस करती है।
आरईबीटी
यह थेरेपी फालतू की सोच को चुनौती देकर और बदलकर भावनात्मक और व्यवहारिक समस्याओं को हल करती है।
एसीटी
यह थेरेपी विचारों और भावनाओं से लड़ने के बजाय उन्हें स्वीकार करने में मदद करती है।
सीबीटी डिप्रेशन से उबरने में कैसे मदद करती है
आपको बता दें सीबीटी लेने के लिए मनोचिकित्सक डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को करीब 20 की ट्रीटमेंट देते हैं। इसके लिए वे पेशेंट को 20 दिनों तक अपने पास बुलाते हैं। इस दौरान अवसाद ग्रस्त इंसान से बात की जाती है और उसके मन में छिपे दर्द को निकालने की कोशिश की जाती है। साथ ही व्यक्ति की सोच, भावनाओं और व्यवहार को बदलने का प्रयास किया जाता है। इस थेरेपी के जरिए इंसान के जीवन को देखने के नजरिए में भी बदलाव किया जाता है ताकि वो डिप्रेशन से मुक्त हो सके।
