हाल ही में बेंगलूरु के कैंसर रोग विशेषज्ञों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को संसद में पेश किए गए बजट में कैंसर की तीन दवाओं से कस्टम शुल्क हटाने की घोषणा का स्वागत किया है। बता दें कि इन दवाओं में ट्रैस्टुजुमैब डेरक्सटेकन, ओसिमर्टिनिब, और डुरवालुमैब शामिल हैं। हालांकि कैंसर एक्सपर्ट्स ने स्वास्थ्य क्षेत्र को अपेक्षित और जरूरी आवंटन नहीं मिलने पर निराशा भी जताई है।
कस्टम शुल्क हटाने का स्वागत
दरअसल हाल ही में एचसीजी अस्पताल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एण्ड ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. बी. एस. अजय कुमार ने कहा कि कस्टम शुल्क हटने से इन दवाओं की कीमतें कम होंगी, जिससे मरीजों को थोड़ी राहत मिलेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन दवाओं के बेहद कीमती होने के कारण विशेषकर निम्न आय वर्ग के मरीजों को इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा सरकार का इरादा तो ठीक है, लेकिन परिणाम में बहुत कुछ कमी रह गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के आवंटन पर निराशा
बता दें कि डॉ. अजय कुमार ने स्वास्थ्य सेवा के लिए आवंटन में कमी पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मेडिकल एक्स-रे मशीनों में उपयोग के लिए एक्स-रे ट्यूब और फ्लैट पैनल डिटेक्टरों के लिए कस्टम सीमा शुल्क में प्रस्तावित परिवर्तनों का शुद्ध प्रभाव एक विस्तृत स्टडी की मांग करता है, लेकिन फिर भी यह प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा स्वास्थ्य सेवा के लिए थोड़ा अधिक आवंटन फिर से इसकी तत्काल आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को संबोधित करने में विफल रहा है। यह रक्षा और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए पर्याप्त आवंटन के सामने महत्वहीन हो गया है।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि कई बार दर्द के बिंदुओं की अनदेखी की जाती है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के माध्यम से ही इन समस्याओं को हल किया जा सकता है। जीवन रक्षक दवाओं और आपातकालीन उपचारों के इर्द-गिर्द के टेक्स स्ट्रक्चर का कोई युक्तिकरण नहीं किया गया है। वहीं जीएसटी के प्रमुख क्षेत्र को अनदेखा किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
