बहुत से घरों में आपने देखा होगा की जो बुजुर्ग होते हैं उनकी यादाश्त समय के साथ कमजोर हो जाती है। दरअसल इसे अल्जाइमर कहा जाता है, ये एक ब्रेन से जुड़ी बीमारी है। दरअसल इस बीमारी में लोगों के दिमाग के सेल्स डैमेज होने लगते हैं। यह प्रोगेसिव डिजीज होती है। जिसकी वजह से लोगों की याददाश्त कमजोर हो जाती है। वहीँ अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे कॉमन टाइप होता है।
इस बीमारी से ब्रेन सिकुड़ने लगता है और इस बीमारी के मरीजों के सोचने-समझने और व्यवहार की क्षमता खत्म होने लगती है। अल्जाइमर डिजीज आमतौर पर बुजुर्गों को ही होती है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को शिकार बना सकती है। वहीँ अगर इसके ट्रीटमेंट की बात करें तो अभी तक सिर्फ मेडिसिन के जरिये ही इसे ठीक किया जाता है।
इलाज के बाद भी यह बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती है। दवाएं केवल इस बीमारी की रफ्तार को कम कर सकती है। ऐसे में ये भी बता दें कि अल्जाइमर के लिए अभी तक किसी तरह की कोई वैक्सीन नहीं बन पायी है।
इन्फेक्शन के बनायी गयी हैं वैक्सीन
दरअसल हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक वैक्सीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से इंफेक्शंस को रोकने के लिए होता है। लेकिन अब इन्हें कई प्रकार के कैंसर सहित गैर-संक्रामक रोगों के लिए भी यूज़ किया जा रहा है। फ्लू की वैक्सीन की बात करें तो इस वैक्सीन के जरिए शरीर के अंदर फ्लू वायरस का बेहद छोटा टुकड़ा डाला जाता है। जिसे इम्यून सिस्टम बाहरी तत्व के तौर पर देखता है और इसे खत्म करने के लिए सेल्स प्रोडक्शन शुरू कर देता है। इस तरह वैक्सीन इंफेक्शन को खत्म करने का काम करती है। हालांकि अल्जाइमर का मामला थोड़ा अलग है।
ब्रेन सेल्स होते हैं डैमेज
बता दें अल्जाइमर डिजीज में अमाइलॉइड-बीटा और ताउ मॉलीक्यूल्स बढ़ने लगते हैं। फिर धीरे धीरे ये ब्रेन सेल्स को डैमेज करने लगते हैं। इससे बचाने के लिए फिलहाल 9 वैक्सीन का ट्रायल चल किया जा रहा है। इन वैक्सीन का ट्रायल उन लोगों पर चल रहा है, जो अल्जाइमर की बीमारी से जूझ रहे हैं। ये वैक्सीन इस तरह बनाई जा रही हैं, जो इम्यून सिस्टम को ब्रेन में जमा अमाइलॉइड-बीटा और ताउ मॉलीक्यूल्स को खत्म करने का काम कर सकें। इसमें से कई इंजेक्शन के जरिए लगाई जाती हैं, जबकि हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में एक नेजल वैक्सीन का भी टेस्ट किया गया।
