एक तरफ जहां कोरोना के नए नए वेरियंट सामने आ रहे हैं, वहीं आये दिन कोरोना को लेकर कई सारे स्टडी के मामले भी सामने आते हैं। ऐसे में एक बार फिर कोरोना को लेकर चौकानें वाली स्टडी का खुलासा हुआ है। इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना महामारी के समय जीतने भी बच्चों का जन्म हुआ है उनका शारीरक और मानसिक विकास दूसरों बच्चों के मुकाबले काफी धीमा है।
बच्चों के समझने और बोलने में दिक्कत आना
स्टडी के मुताबिक जिन बच्चों का जन्म कोरोना के समय हुआ है उनमें स्कूल टाइम में काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा है। बता दें जो बच्चे अब प्ले और प्री-स्कूल में जाने लायक हो गए हैं, उनमें काफी स्ट्रेस और अलगाव देखा जा रहा है। इतना ही नहीं कुछ बच्चे तो ऐसे भी है जिन्हें स्कूल या घर में किसी से बात करने और उन्हें समझने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिस वजह से वो चुपचाप और अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
24 से ज्यादा डॉक्टरों और टीचर्स ने बताया
बता दें कि यह सभी बाते स्टडी में 24 से ज्यादा डॉक्टरों और टीचर्स ने बताया है। उन्होंने यह भी बताया है कि इन बच्चों को जब पढ़ाया जाता है तो उन्हें ठीक से समझ नहीं आता है और न ही वो किसी चीज को जल्दी से याद रख पाते हैं। स्टडी के मुताबिक बच्चों को पेंसिल पकड़ने से लेकर अपने जरूरत को बताने और फोटो या पिक्चर पहचानने और अक्षरों को पहचानने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बच्चे अपनी मन की बाते भी सही से किसी कॉ शेयर नहीं कर पाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक महामारी के दौरान लड़कियों के मुकाबले सबसे ज्यादा लड़के प्रभावित हुए हैं।
कोविड-19 के समय बच्चों पर दबाव बनाना
अमेरिका के पोर्टलैंड स्थित ‘ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी’ में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जैमे पीटरसन ने बताया कि कोविड-19 के दौरान पैदा हुए बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल कोरोना के समय बच्चों को बाहर न खेलने देना, मास्क पहनने रखना है, बड़े लोगों से न मिलने देना, लोगों से दूर रहने की सलाह देने जैसी आदतों ने बच्चों के ऊपर नारात्मक रूप से प्रभाव डाला है। वहीं जो बच्चे थोड़े बड़े थे उन्हें महामारी के समय घर में काफी दिनों तक बंद रखा गया, जिस वजह से उन पर इसका बुरा असर भी देखा गया है।
