वैसे तो समय पर पेशेंट की बीमारी का पता चलने पर इलाज करना सभी डॉक्टर का फर्ज है। लेकिन दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें बीमारी का तो पता होता है लेकिन डॉक्टर पेशेंट का इलाज नहीं करते हैं। दरअसल एक ऐसा ही मामला बिहार के बेगूसराय से आया है जहां एक मां 6 साल से अपने बच्चे की हार्ट सर्जरी के लिए दिल्ली एम्स का चक्कर काटती है। लेकिन उसे अपने बच्चे की सर्जरी कराने में काफी समय लगा। हालांकि इस घटना की खबरों में आने के बाद, बच्चे को एम्स में हार्ट सर्जरी की सुविधा मिली है।
कई बार बच्चे के सर्जरी के लिए मदद मांगी
इस मामले में बच्चे की मां ने बताया कि उन्होंने अनेक बार AIIMS के विभिन्न विभागों में अपने बच्चे के इलाज के लिए सहायता मांगी, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। जिसके बाद वे मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को सार्वजनिक किया और अपने बच्चे के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई। जिस वजह से एम्स पर सामाजिक दबाव बढ़ा और बाद में AIIMS ने बच्चे के लिए हाई लेवल ट्रीटमेंट की व्यवस्था किया।
AIIMS ने भी नहीं दी मदद
बच्चे की मां ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अपनी समस्या को साझा किया, लेकिन कहीं भी उन्हें आवश्यक सहायता नहीं मिली। उन्होंने इस मुद्दे को AIIMS तक ले जाने के बाद उम्मीद की थी कि उनके बच्चे को जरूर इलाज मिलेगा, लेकिन इसमें भी वे निराश हो गए।
बच्चे की हार्ट सर्जरी हुई सफल
बता दें कि मामले के सामने आने के बाद AIIMS की तरफ से विशेष टीम ने बच्चे की स्थिति की जांच की और उसे उच्च स्तरीय उपचार के लिए तैयार किया। इस प्रक्रिया में मामले की जांच करने के लिए कई महीनों तक का समय लगा, लेकिन बच्चे की उम्मीदें जीत गईं जब उसे अंततः सही समय पर आवश्यक ट्रीटमेंट मिला।
बच्चे की हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक हुई और उसकी कंडीशन अब बेहतर है। उसकी मां ने समाजिक मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को साझा करके एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि कैसे लाचारी की स्थिति में आने पर सोशल मीडिया की मदद लेना सही होता है। शायद वो मीडिया पर अपनी परेशानी सांझा न करती तो आज भी वो अपने बच्चे के इलाज का इंतजार करती।
इसके अलावा, इस मामले ने भी संकेत दिया है कि मेडिकल सिस्टम में कुछ सुधार की आवश्यकता है, ताकि ऐसी स्थितियों में रोगी को समय पर उचित उपचार मिल सके।
