Indian Army : जब कोई जल जाता है या फिर किसी का एक्सीडेंट होने पर स्किन डैमेज हो जाती है तो उसकी स्किन को ठीक करने के लिए शरीर के दूसरे भाग से स्किन निकाल कर उस भाग का सर्जरी के द्वारा इलाज किया जाता है। अब ऐसे में 18 जून को भारतीय सेना ने सेना अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) में एक अत्याधुनिक स्किन बैंक सुविधा खोलने की घोषणा की है। यह सुविधा सेना में काम करने वाले कर्मियों और उनके परिवारों को दी जाएगी।
तीन तरह के मरीज का होगा इलाज
बता दें इस सुविधा को लाने का उद्देश्य है सेना में काम करने वालों कर्मियों की विभिन्न परिस्थितियों में इलाज देना है। इस इलाज के दौरान तीन तरह के मरीज सुविधा ले सकते हैं जिसमे घरेलू आग दुर्घटनाओं, बिजली की घटनाओं, और केरोसिन वार्मर से होने वाली चोटें शामिल हैं। बता दें देश के कई हिस्सों में निजी त्वचा बैंक पहले से मौजूद हैं।
हालांकि, सेना को जब आवश्यकता होती है तो उनसे त्वचा प्राप्त करना कठिन होता है। इसलिए नया स्किन बैंक Collection, processing, storage and ग्राफ्ट की distribution के रूप में काम करेगा, जो देश भर में सैन्य चिकित्सा केंद्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन प्रदान करेगा।
वहीँ इस सुविधा से सेना कर्मियों और उनके परिवारों को इसकी सविधा आसानी से मिल पायेगी। स्किन बैंक में प्लास्टिक सर्जन, टिशू इंजीनियर और विशेष तकनीशियनों सहित उच्च प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों का स्टाफ होगा। वहीँ रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सुविधा उच्चतम गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा मानकों का पालन करेगी, जिससे त्वचा के ग्राफ्ट की अखंडता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
गुणवत्ता की देखभाल
बता दें DGMS (सेना) और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अरिंदम चटर्जी ने स्किन बैंक के शुभारंभ को सेवा सदस्यों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के रूप में वर्णित किया क्योंकि इससे देखभाल की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अजित नीलकांतन ने कहा, स्किन बैंक होने हम अपने रोगियों को सबसे प्रभावी उपचार दे पाएंगे। साथ ही उनके ठीक होने और पुनर्वास की संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं।
त्वचा दान के बारे में अधिक जागरूकता
सेना मानती है कि देश में स्किन डोनेशन के बारे में अधिक जागरूकता बढ़ानी चाहिए ताकि मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पूरा किया जा सके। अस्पताल स्रोतों के अनुसार, लोग अपने अंगांगों का अंगदान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन त्वचा के अंगदान से डरते हैं क्योंकि उन्हें यह डर होता है कि इससे शरीर को काट दिया जाएगा।
बता दें स्किन डोनेशन की प्रक्रिया तीन से चार हफ्ते लेती है क्योंकि त्वचा को कुछ परीक्षणों से गुजरना होता है जैसे कि यह साफ है कि यह कल्चर और फंगल-नेगेटिव है। डॉक्टरों ने बताया कि किसी भी त्वचा को किसी भी व्यक्ति पर उपयोग किया जा सकता है, और दो से तीन हफ्ते के भीतर प्रत्यारोपण या ग्राफ्टिंग के बाद, डॉक्टर यह जांच सकते हैं कि क्या रोगी इसे स्वीकार कर रहा है या नहीं।
