अगर आप पिछले 45 दिनों से ज्यादा समय से स्टेरॉयड दवाओं का सेवन कर रहे हैं या इन्हेलर, स्प्रे, क्रीम जैसी स्टेरॉयड युक्त दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको सतर्क होने की आवश्यकता है। एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लगातार छह सप्ताह से ज्यादा समय तक स्टेरॉयड का सेवन करने से आपकी आंखों की रोशनी पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह खतरा खासकर उन लोगों के लिए है जो स्टेरॉयड का इस्तेमाल खांसी, नाक की एलर्जी या त्वचा संक्रमण के लिए करते हैं।

आंखों में दबाव बढ़ने से ग्लूकोमा का खतरा

एम्स के डॉक्टरों के अनुसार स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है। ऑप्टिक नर्व वह नस है जो आंखों को दिमाग से जोड़ती है। अगर यह नर्व डैमेज हो जाती है, तो आंखों की रोशनी की रिकवरी संभव नहीं होती। एम्स के ग्लूकोमा यूनिट के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. तनुज दादा ने बताया कि स्टेरॉयड के उपयोग से आंखों में दबाव बढ़ता है, जिससे ग्लूकोमा (काला मोतिया) हो सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बीमारी के शुरूआती चरण में कोई लक्षण नहीं होते और अक्सर मरीज को तब इसका पता चलता है जब एक आंख की रोशनी चली जाती है।

किसे है ज्यादा खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परिवार में किसी को काला मोतिया (ग्लूकोमा) की समस्या है, तो अन्य परिवार के सदस्यों में यह समस्या 10 गुना अधिक हो सकती है। इसके अलावा जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या थायरॉइड जैसी बीमारियां हैं, उन्हें भी ग्लूकोमा का खतरा ज्यादा होता है। एम्स के सामुदायिक नेत्र विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रवीन वशिष्ठ के अनुसार 40 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को हर 2-3 साल में आंखों की जांच करवानी चाहिए, और 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को हर साल आंखों की जांच करानी चाहिए।

तनाव और आंखों के दबाव का संबंध

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि मानसिक तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है। इससे आंखों का दबाव (Intraocular Pressure) बढ़ सकता है, जिससे काला मोतिया होने का खतरा और बढ़ जाता है। सामान्य स्थिति में आंखों का दबाव 10 से 21 मिमी एचजी के बीच होता है, लेकिन तनाव की स्थिति में यह दबाव बढ़ सकता है।

कैसे करें बचाव?

आंखों की नियमित जांच करवाएं

यदि आप स्टेरॉयड ले रहे हैं तो अपनी आंखों की नियमित जांच कराएं।

आंखों की दवाएं सावधानी से लें

खुद से कोई नेत्र संबंधी दवा न लें, खासकर अगर आंख में चोट लगी हो।

योगासन का अभ्यास करें

भ्रामरी और अनुलोम-विलोम जैसे योगासनों से कॉर्टिसोल स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे ग्लूकोमा का खतरा घटता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *