होली आने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। यह ऐसा त्योहार है जिसके आने से पहले ही लोगों में एक्साइटमेंट बढ़ने लगती है। इसका सिर्फ सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि धार्मिक तौर पर भी महत्व होता है। हर्षोल्लास से भरे इस त्योहार को आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स शारीरिक तंदरुस्ती बढ़ाने के लिए भी बहुत ही खास मानते हैं लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि होलिका दहन का कैसे आपकी हेल्थ के साथ जुड़ा हुआ है।
आयुर्वेद में बताया है खास कनेक्शन
होली और होलिका दहन को लेकर कई सारे आयुर्वेदिक तथ्य बताए गए हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स की मानें तो यह त्योहार सर्दियों के वसंत के मौसम में होने वाला इंफेक्शन से जुड़ा हुआ है। सूर्य की बढ़ती हुई गर्मी के कारण शरीर में जमा कफ बाहर निकालने के तौर पर इशारा करता है। ऐसे में शरीर में होने वाला यह बदलाव कफ दोष को ट्रिगर करता है। खासतौर पर इससे कफ से जुड़ी बीमारियां जन्म लेती हैं।

बसंत में फैलती हैं ये बीमारियां
इस ऋतु में हैजा और चेचक जैसी बीमारियां फैलती हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए पुराने जमाने में ऋषि होलिका दहन जैसे अनुष्ठानों के लिए कहते थे। होली से एक दिन पहले जलाई जाने वाली आग बहुत ही शुद्ध मानी जाती है। इससे न सिर्फ शरीर को एनर्जी मिलती है बल्कि पर्यावरण में मौजूद कीटाणु भी खत्म होते हैं और यह शुद्ध होता है। खासतौर पर सर्दियों के कोहरे से होने वाली सुस्ती के बाद यह दिक्कतें हो सकती हैं।
ओवरऑल हेल्थ रहेगी अच्छी
होलिका दहन में यदि आप भाग लेंगे तो इससे आपका सारा शरीर शुद्ध होगा क्योंकि होलिका दहन का धुआं गाय के गोबर के उपलों, कपूर और नारियल की लकड़ी से बनाया जाता है। खासतौर पर इसमें रोगाणु नाशक गुण पाए जाते हैं जो अनुष्ठान से वातावरण को शुद्ध करने का भी काम करते हैं ऐसे में यह त्योहार आपकी ओवरऑल हेल्थ को भी अच्छा रखता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
