अंडे को अक्सर प्रोटीन से भरपूर और हेल्दी माना जाता है। इसे बच्चों से लेकर बड़ों तक की डाइट में शामिल किया जाता है, और यह बहुत से लोगों के ब्रेकफास्ट, लंच, और डिनर का अहम हिस्सा होता है। लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने अंडे के सेवन को लेकर एक नया और चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अंडे खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

अंडे और कैंसर का संबंध

Nutrition Facts वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस तरीके से हम अंडे पकाते हैं, वह इसके स्वास्थ्य पर असर डालता है। रिपोर्ट के अनुसार, अंडे को तला हुआ रूप में खाने से कार्सिनोजेनिक केमिकल्स उत्पन्न हो सकते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। उच्च तापमान पर अंडे तलने से यह खतरनाक केमिकल्स बनते हैं, जबकि उबले हुए अंडे इससे ज्यादा सुरक्षित होते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, हफ्ते में कुछ अंडे खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा 19% तक बढ़ सकता है। और यदि कोई व्यक्ति हफ्ते में तीन या उससे अधिक अंडे खाता है, तो यह खतरा 71% तक बढ़ सकता है।

अंडे में मौजूद कोलीन और उसका प्रभाव

अंडे में कोलीन की अधिक मात्रा पाई जाती है, जो आंत के बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर ट्राइमेथिलैमाइन (TMA) में बदल जाता है। यह TMA बाद में ट्राइमेथिलैमाइन-एन-ऑक्साइड (TMAO) में परिवर्तित हो जाता है, जो सूजन और कैंसर के बढ़ने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि TMAO का उच्च स्तर सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और ट्यूमर के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे कैंसर के जोखिम में वृद्धि हो सकती है, खासकर कोलन और लीवर कैंसर में।

अंडे से कैंसर का संबंध: एक और स्टडी

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन में भी अंडे के अधिक सेवन और कैंसर के बढ़ते खतरों के बीच संबंध पाया गया। उरुग्वे में 1996 से 2004 तक किए गए एक केस-कंट्रोल अध्ययन में 3,539 कैंसर के मामलों और 2,032 हॉस्पिटल कंट्रोल को शामिल किया गया, जिसमें अंडे के अधिक सेवन से कैंसर के खतरे में बढ़ोतरी दिखाई दी।

क्या अंडे खाना बंद कर देना चाहिए?

हालांकि अंडे से कैंसर होने की संभावना को लेकर चेतावनियाँ दी जा रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अंडे को पूरी तरह से छोड़ने की बजाय उनका सेवन सीमित करना चाहिए। एक व्यक्ति को सप्ताह में केवल एक या दो अंडे ही खाने चाहिए। इसके अलावा, प्रोबायोटिक्स, फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करके हम अपने गट माइक्रोबायोम को संतुलित कर सकते हैं, जिससे TMAO के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

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