आजकल महिलाएं अपनी पढ़ाई और करियर की ख्वाहिशें पूरी करते हुए, तीसरी दशकीय उम्र में परिवार बढ़ाने का निर्णय ले रही हैं। इसे “लेट प्रेग्नेंसी” के रूप में जाना जाता है, और इस ट्रेंड का हिस्सा बॉलीवुड अभिनेत्री कियारा आडवाणी भी बन चुकी हैं। कियारा की उम्र 33 साल है, जो गर्भधारण के लिहाज से आदर्श उम्र नहीं मानी जाती। इस समय पर गर्भधारण करने वाली महिलाओं को स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियां होती हैं, जिन्हें सही सावधानी से दूर किया जा सकता है।
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कंसीव करने की उम्र में बदलाव
कियारा आडवाणी के अनुसार, आज की जेनरेशन और पिछली जेनरेशन में गर्भधारण की उम्र में काफी अंतर देखा जाता है। अधिकतर महिलाएं अब 30 के दशक में प्रेग्नेंसी की योजना बनाती हैं, जबकि चिकित्सा दृष्टिकोण से 35 साल के बाद गर्भधारण को एडवांस स्टेज माना जाता है।
प्रीक्लेम्पसिया का खतरा
लेट प्रेग्नेंसी के दौरान बायोलॉजिकल क्लॉक का ध्यान रखना आवश्यक होता है। 40 से ऊपर की उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया का खतरा बढ़ जाता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर और यूरिन में प्रोटीन की समस्या होती है।
एग की क्वांटिटी और क्वालिटी
30 वर्ष की आयु तक आते-आते महिलाओं में एग की क्वांटिटी और क्वालिटी कम होने लगती है। इस उम्र में महिलाओं के एग गर्भधारण के लिए कम तैयार होते हैं, जिससे गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।
गैस्टेशनल डायबिटीज का खतरा
लेट प्रेग्नेंसी में गैस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक होता है। यह बीमारी सिर्फ गर्भवस्था के दौरान होती है और उम्रदराज महिलाओं में इसे होने की संभावना ज्यादा रहती है। उचित डाइट और शारीरिक गतिविधि से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इलाज न होने पर यह बच्चे के विकास पर असर डाल सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
लेट प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी ज्यादा देखी जाती है। यह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला को समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
सी-सेक्शन की संभावना
लेट प्रेग्नेंसी में सी-सेक्शन की संभावना भी अधिक होती है। डॉक्टर की सलाह पर गर्भावस्था के दौरान कोई भी जटिलता होने पर डिलीवरी जल्दी भी कराई जा सकती है।
डाउन सिंड्रोम और अन्य खतरे
35 वर्ष के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं के बच्चों को डाउन सिंड्रोम जैसी क्रोमोसोमल समस्याओं का खतरा भी अधिक होता है। इसके अलावा मृत प्रसव और गर्भपात जैसी गंभीर स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।
सावधानियां और डॉक्टर की सलाह
30 के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं को अपनी और बच्चे की सेहत का ध्यान रखते हुए कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए:
डायबिटीज है तो ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें।
फोलिक एसिड और प्रीनेटल विटामिन का सेवन करें।
स्मोकिंग और एल्कोहल से दूर रहें।
व्यायाम करें और हेल्दी डाइट लें।
फल, सब्जियां, लीन मीट और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करें।
हेल्दी वेट रेंज बनाए रखें।
इस प्रकार, लेट प्रेग्नेंसी के दौरान सही देखभाल और सावधानियों से किसी भी प्रकार के खतरे से बचा जा सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
