पुणे में Guillain-Barré Syndrome (GBS) और Bickerstaff Brainstem Encephalitis (BBE) के दुर्लभ मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में एक 60 वर्षीय व्यक्ति की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई, जो BBE से पीड़ित थे। पुणे के पूना अस्पताल और रिसर्च सेंटर के कंसल्टिंग न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. सुधीर कोठारी ने इसे एक “दुर्लभ और असामान्य मामला” बताया। मरीज को दस्त, निचले अंगों की कमजोरी और नींद में डूबने जैसी समस्याएँ थीं। BBE एक दुर्लभ तंत्रिका तंत्र का विकार है, जिसमें मस्तिष्क के ब्रेनस्टेम की सूजन होती है।
क्या है Bickerstaff Brainstem Encephalitis (BBE)
BBE एक तीव्र और दुर्लभ तंत्रिका तंत्र विकार है, जो संक्रमण के बाद उत्पन्न होता है। इसमें ब्रेनस्टेम में सूजन हो जाती है, जिसके कारण तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं का नुकसान होता है (डिमाइलिनेशन)। यह रोग आमतौर पर एक त्वरित शुरुआत के साथ होता है और इसमें श्वसन संक्रमण, दस्त, या फ्लू जैसी बीमारियाँ पहले होते हैं। हालांकि BBE के वास्तविक कारण अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह संक्रमण के बाद की इम्यून प्रतिक्रिया के कारण उत्पन्न होने की संभावना है।
BBE के लक्षण
BBE के प्रमुख लक्षणों में चलने में असंतुलन (एटैक्सिया), नेत्र पैलियों की कमजोरी (ऑफ्थल्मोप्लेजिया), डबल विजन, और हाथ-पैरों में कमजोरी शामिल हैं। इसके अलावा मरीजों को श्वसन संक्रमण या दस्त जैसी समस्याएँ एक- दो सप्ताह पहले होती हैं। डॉ. सुधीर कुमार, अपोलो अस्पताल, हैदराबाद के कंसल्टिंग न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया कि यह रोग सामान्यतः संक्रमण के बाद उत्पन्न होता है।
BBE और Guillain-Barré Syndrome (GBS) में अंतर
BBE और Guillain-Barré Syndrome (GBS) दोनों ही पोस्ट-इंफेक्टियस इम्यून-मेडिएटेड न्यूरोलॉजिकल बीमारियाँ हैं, लेकिन इनमें एक महत्वपूर्ण अंतर है। GBS परिधीय तंत्रिका तंत्र (peripheral nervous system) को प्रभावित करता है, जबकि BBE केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) के ब्रेनस्टेम को प्रभावित करता है।
BBE का निदान और उपचार
BBE का निदान मुख्यतः MRI द्वारा किया जाता है, जिसमें ब्रेनस्टेम की सूजन दिखाई देती है। इसके अलावा सीरम एंटीगैंग्लियोसाइड एंटीबॉडीज (anti-GQ1b) की जांच भी की जाती है, जो दो-तिहाई मामलों में पाई जाती है। BBE का इलाज Guillain-Barré Syndrome (GBS) के समान होता है, जिसमें IVIG (इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन) और प्लाज्मा एक्सचेंज जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
समय रहते निदान और उपचार से मरीज की हालत में सुधार हो सकता है, और इस गंभीर स्थिति का प्रबंधन किया जा सकता है। BBE की पहचान और उपचार में जल्दी कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है।
