हाल ही में भारत के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक सफदरजंग अस्पताल ने ब्लड कैंसर (लिम्फोमा) के एक मरीज पर पहली बार सीएआर-टी (Chimeric Antigen Receptor T-cell) थेरेपी सफलतापूर्वक लागू की है। इस उपचार के बाद महिला मरीज को राहत मिली और उसकी स्थिति में सुधार हुआ, जिससे उसे नया जीवन मिला। यह कदम सफदरजंग अस्पताल को इम्यूनोथेरेपी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रदान करता है।

क्या है सीएआर-टी थेरेपी?

सीएआर-टी (Chimeric Antigen Receptor T-cell) थेरेपी एक अत्याधुनिक इम्यूनोथेरेपी है, जिसका उद्देश्य कैंसर से लड़ने के लिए रोगी की इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय करना है। इसमें मरीज के शरीर से टी-सेल्स (immunity cells) निकाले जाते हैं, फिर इन्हें जेनेटिकली मॉडिफाई कर के कैंसर से लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। बाद में इन कोशिकाओं को मरीज के शरीर में वापस डाला जाता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाया जाता है।

सफदरजंग अस्पताल की उपलब्धि

सफदरजंग अस्पताल अब भारत का पहला केंद्रीय सरकारी अस्पताल बन गया है, जहां सीएआर-टी थेरेपी दी जा रही है। इससे पहले केवल दो अन्य सरकारी संस्थानों पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स दिल्ली में ही इस थेरेपी का उपयोग किया गया था। सफदरजंग अस्पताल ने इस इलाज को अपने कैंसर विभाग के तहत लागू किया और इसने इलाज के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है।

मरीज की स्थिति और इलाज

यह थेरेपी 48 वर्षीय महिला पर लागू की गई, जो एक साल पहले लिम्फोमा कैंसर से पीड़ित पाई गई थी। मरीज के शरीर में गिल्टियां (मांस की गांठें) बढ़ रही थीं, और पारंपरिक उपचारों का कोई असर नहीं हो रहा था। सफदरजंग अस्पताल के कैंसर विभाग ने इस नई थेरेपी को अपनाया, और इलाज सफल रहा। अस्पताल के कैंसर विभाग के प्रमुख डॉ. कौशल कालरा ने बताया कि इस उपचार के परिणाम उत्साहजनक रहे, जिससे रोगी को राहत मिली और डॉक्टरों को भी उम्मीद बंधी।

आधुनिक चिकित्सा में कदम

इस सफलता के साथ सफदरजंग अस्पताल ने न केवल चिकित्सा क्षेत्र में अपनी भूमिका को मजबूत किया, बल्कि उत्तर भारत में इम्यूनोथेरेपी के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि यह उपलब्धि अस्पताल की प्रतिबद्धता और प्रयासों का परिणाम है, जिससे देशभर में रोगियों को उन्नत चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।

टीम का योगदान

सीएआर-टी थेरेपी को लागू करने वाली टीम में डॉ. कौशल कालरा, डॉ. संदीप बंसल और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल थे। इस टीम ने चिकित्सा के क्षेत्र में इस अत्याधुनिक तकनीक का सफलतापूर्वक प्रयोग किया, जिससे एक मरीज को नया जीवन मिला और यह अस्पताल की उपलब्धि में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

भविष्य की दिशा

भले ही इस थेरेपी के बाद मरीज में सुधार दिख रहा हो, कैंसर से पूरी तरह मुक्ति पाने में कुछ समय लग सकता है। फिर भी यह इलाज कैंसर के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है। सफदरजंग अस्पताल की इस उपलब्धि से देश में और भी मरीजों को इस जीवन रक्षक उपचार तक पहुंच मिल सकेगी, और यह अस्पताल की प्रतिष्ठा को और भी ऊंचा करेगा।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *