छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों की आंखों की जांच कराई जाती है। वर्ष 2024-25 में भी कबीरधाम जिले के शासकीय स्कूलों में बच्चों की आंखों की जांच की गई। इस जांच के दौरान 19 शासकीय स्कूलों के 624 विद्यार्थी दृष्टिदोष से ग्रसित पाए गए, जो कि चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। यह आंकड़ा खास तौर पर इसलिए गंभीर है, क्योंकि केवल कुछ गिने-चुने स्कूलों में ही इस तरह की जांच की गई और फिर भी बड़ी संख्या में बच्चे दृष्टिदोष से प्रभावित मिले।
दृष्टिदोष का मुख्य कारण और उसके प्रभाव
इस बार की जांच में अधिकांश बच्चों को दूर दृष्टिदोष की समस्या पाई गई। इन बच्चों को दूर की चीजें स्पष्ट रूप से देखने में परेशानी हो रही थी। यह समस्या गंभीर है, क्योंकि यह उम्र के छोटे चरणों में ही सामने आ रही है, जो आगे चलकर और भी विकराल हो सकती है। यदि 11 से 14 वर्ष के बच्चों में इस तरह की समस्या पाई जा रही है, तो यह भविष्य में और अधिक जटिल हो सकती है। अगर पूरे जिले में बच्चों की आंखों की जांच की जाए तो यह अंदाजा लगाना कठिन है कि दृष्टिदोष से प्रभावित बच्चों की संख्या कितनी होगी।
आहार की कमी और दृष्टिदोष का बढ़ना
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में दृष्टिदोष का मुख्य कारण खानपान में पोषक तत्वों की कमी है। इसके अलावा, प्रदूषण, केमिकलयुक्त आहार और संतुलित आहार का अभाव भी इसकी प्रमुख वजहें हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 100 में से 3 बच्चे दृष्टिदोष से ग्रसित हैं, जो चिंता का विषय है। इससे यह भी स्पष्ट है कि यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और अगर इसे समय रहते रोकने के उपाय नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्कूलों में बच्चों को हो रही परेशानी
दृष्टिदोष के कारण बच्चों को पढ़ाई में भी कठिनाई हो रही है। कक्षा में ब्लैक बोर्ड पर लिखे गए वाक्य और अंकों को समझने में उन्हें परेशानी होती है। परिणामस्वरूप, ऐसे बच्चे कक्षा में गलत उत्तर देते हैं, जिससे उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, शिक्षक द्वारा पूछे गए सवालों का सही उत्तर न दे पाने के कारण बच्चे मानसिक दबाव का शिकार हो जाते हैं।
चश्मा: एक प्रभावी उपाय
बच्चों के दृष्टिदोष को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चश्मा प्रदान किया जाता है। वर्ष 2024-25 में अब तक 624 बच्चों को चश्मा वितरित किया जा चुका है। हालांकि यह देखा गया है कि हर वर्ष बच्चों को चश्मा बांटा जाता है, लेकिन इनमें से केवल कुछ ही बच्चे इसका नियमित उपयोग करते हैं। चश्मा बच्चों की आंखों की कमजोरी को बढ़ने से रोक सकता है, अन्यथा यह समस्या समय के साथ और विकराल हो सकती है।
मध्याह्न भोजन में पौष्टिकता की कमी
शासकीय स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन प्रदान किया जाता है, लेकिन यह भोजन केवल भूख मिटाने तक ही सीमित है। इसमें पौष्टिक तत्वों की भारी कमी पाई जाती है। आमतौर पर स्कूलों में चावल, दाल और मौसम की सस्ती सब्जियां परोसी जाती हैं, जो पौष्टिकता में कमी होती है। दाल में अधिक पानी होने के कारण इसकी पोषण गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे बच्चों को उचित पोषण नहीं मिल पाता, जिससे दृष्टिदोष जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके विपरीत बच्चों को घर में अधिक पौष्टिक भोजन मिल रहा है, जो उनकी सेहत के लिए फायदेमंद है।
समय रहते कदम उठाने की आवश्यकता
बच्चों में दृष्टिदोष और इसके कारण उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए जरूरी है कि समय रहते उपाय किए जाएं। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को पत्तेदार सब्जियां, पीले फल, और विटामिन A युक्त आहार देना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को पढ़ाई के दौरान आंखों को कुछ समय के लिए आराम देने की भी सलाह दी जाती है। इसके साथ ही डॉक्टर से नियमित जांच करवाना और उनकी सलाह अनुसार दवाइयों का उपयोग भी जरूरी है।
