केरल के अलप्पुझा जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दंपती ने अपने बच्चे में आनुवांशिक बीमारी का पता लगाने में नाकाम रहने के लिए चार डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। दंपती का आरोप है कि डॉक्टरों ने प्रसव से पहले की गई जांचों के दौरान यह नहीं बताया कि उनके नवजात शिशु में आनुवंशिक बीमारी हो सकती है, जबकि डॉक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि सभी रिपोर्ट सामान्य हैं। इसके बाद बच्चा पैदा होने के चार दिन बाद उनकी हालत का खुलासा हुआ।
केस में शामिल डॉक्टर
अलप्पुझा दक्षिण पुलिस के अनुसार इस मामले में चार डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें दो महिला डॉक्टर कडप्पुरम सरकारी महिला एवं बाल अस्पताल से हैं, जबकि दो अन्य डॉक्टर निजी डायग्नोस्टिक लैब से संबंधित हैं। पुलिस ने अनीश और सुरुमी द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की।
प्रसव से पहले की गई जांचों में चूक
दंपती का कहना है कि प्रसव से पहले जो जांचें करवाई गईं, उनमें बच्चे की आनुवांशिक बीमारी का पता लगाने में डॉक्टर पूरी तरह से नाकाम रहे। इसके बजाय उन्होंने सुरुमी और अनीश को यह आश्वासन दिया कि रिपोर्ट सामान्य हैं। सुरुमी का कहना है कि उन्हें प्रसव के चार दिन बाद बच्चा दिखाया गया, जब उसकी बीमारी का पता चला। इस पर उनका गुस्सा फूटा, और उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
घटना का पूरा विवरण
बता दें कि 35 वर्षीय सुरुमी 30 अक्टूबर को कडप्पुरम महिला एवं बाल अस्पताल में भर्ती हुई थीं। यह उनका तीसरा प्रसव था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने भ्रूण की गति और दिल की धड़कन का सही से परीक्षण नहीं किया, जिसके बाद उन्हें अलप्पुझा के वंदनम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमसीएच) में रेफर कर दिया गया। एमसीएच में 8 नवंबर को सर्जरी के दौरान बच्चे में गंभीर आनुवांशिक बीमारियों का पता चला।
डॉक्टरों का बचाव
इस बीच आरोपियों में से एक डॉक्टर ने सफाई दी है कि उसने सुरुमी का इलाज गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों के दौरान किया था। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में उन्होंने कई बार सुरुमी की जांच की थी और उनकी रिपोर्ट में कुछ संकेत मिले थे, लेकिन कोई ठोस मामला सामने नहीं आया। वहीं डायग्नोस्टिक लैब के डॉक्टरों का कहना है कि स्कैन रिपोर्ट में कोई गलती नहीं थी और सभी रिपोर्ट सामान्य थीं।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और आरोपियों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में पूरी जांच की जाएगी और आरोपी डॉक्टरों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।
