दूध को हड्डियों के लिए फायदेमंद माना जाता है, इसलिए बड़े बुजुर्ग इसे पीने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूध की सप्लाई चेन में कई चरणों पर दूषित तत्व मिल सकते हैं, जैसे विषाक्त पदार्थ, कीटनाशक, भारी धातुएं, पशु चिकित्सा दवाएं और जैविक प्रदूषक? इनमें से सबसे आम समस्या एंटीबायोटिक अवशेष है, जो मस्तिटिस के इलाज, इंजेक्शनों या गंदे चारे के कारण दूध में आ सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

दूध में एंटीबायोटिक अवशेष का स्वास्थ्य पर असर

दूध में एंटीबायोटिक अवशेषों से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR), आंतों के बैक्टीरिया में गड़बड़ी और एलर्जी। इसके अलावा एंटीबायोटिक दूध के प्रोसेसिंग को भी प्रभावित करते हैं, जैसे दही और योगर्ट का ठीक से जमना न होना, पनीर सही से तैयार न होना और फर्मेंटेड प्रोडक्ट्स का स्वाद खराब होना। यह न केवल उत्पाद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि उद्योग को आर्थिक नुकसान भी होता है।

भारत में दूध में एंटीबायोटिक अवशेष का हाल

पिछले कुछ वर्षों में कई सर्वेक्षणों में दूध में एंटीबायोटिक अवशेष की समस्या सामने आई है। 2016 के राष्ट्रीय दूध मिलावट सर्वेक्षण में 6,432 दूध के नमूनों में से 77 (1.2%) में एंटीबायोटिक अवशेष पाए गए। इसी तरह 2022 में 798 नमूनों में से 0.4% नमूनों में निर्धारित सीमा से ज्यादा एंटीबायोटिक पाया गया। इसके बावजूद भारत में रोजाना 670 मिलियन लीटर दूध का उत्पादन होता है, और इसका 1.2% यानि 8 मिलियन लीटर दूध एंटीबायोटिक अवशेष से संदूषित होता है। यह संख्या पूरी नीदरलैंड्स की आबादी के बराबर है।

दूध में एंटीबायोटिक अवशेष के कारण

एंटीबायोटिक का अव्यवस्थित उपयोग: खासतौर पर मस्तिटिस के इलाज में।

झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा एंटीबायोटिक्स का अनियंत्रित प्रयोग।

किसानों में जागरूकता की कमी कि एंटीबायोटिक का सेवन मानव स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

दूध की आपूर्ति के लिए गंदे और साफ दूध का मिश्रण।

समाधान के लिए सुझाव

भारत में एंटीबायोटिक्स के परीक्षण के लिए सख्त नियम हैं, लेकिन इसे हल करने के लिए एक नया दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या का समाधान तीन मुख्य बिंदुओं पर निर्भर करता है:

किसानों को सही प्रशिक्षण देना

किसानों को सही कृषि प्रथाओं और वैकल्पिक उपचार विधियों के बारे में जानकारी देना।

नई तकनीकों का विकास

एंटीबायोटिक परीक्षण के लिए सस्ते और त्वरित परीक्षण उपकरणों का विकास करना।

कृषि प्रथाओं में सुधार

जैसे कैलिफोर्निया मस्तिटिस टेस्ट का उपयोग करके मस्तिटिस के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग कम करना।

सरकारी हस्तक्षेप और समन्वित प्रयास

एफएसएसएआई ने हाल ही में दूध उत्पादकों का पंजीकरण शुरू किया है, जिससे उन्हें अच्छे कृषि प्रथाओं के बारे में शिक्षा दी जा सके। साथ ही सरकार को दूध में एंटीबायोटिक अवशेष कम करने के लिए किसानो को बिना एंटीबायोटिक वाला दूध उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

इसके अलावा सरकार को पशु चिकित्सा दवाओं पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डॉक्टर सही तरीके से एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करें।

By tnm

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