केरल स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (केएसपीसीबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को एक रिपोर्ट में पेरियार नदी में महत्वपूर्ण मल प्रदूषण के बारे में बताया। ये ऑब्जरवेशन नेशनल वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम द्वारा 2022, 2023 और 2024 के डाटा पर आधारित है। रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि ये प्रदूषण शहरी और घरेलू चीजों से होने वाले प्रदूषण को दिखाता है। नदी में डिसॉल्व हो चुका ऑक्सीजन (डीओ) के निम्न स्तर की चिंताजनक प्रवृत्ति देखी गई है, खासकर गर्मियों के महीनों के दौरान निचले हिस्सों में।
प्रदूषण को रोकने के लिए समिति का गठन
20-21 मई के दौरान मछलियों की मौत की घटना को केएसपीसीबी ने एनजीटी को बताया। इसके चलते 10 जून कोकेरल उच्च न्यायालय ने नदी में प्रदूषण को रोकने के उपाय सुझाने के लिए एक समिति के गठन करने का निर्देश दिया था और 3 जुलाई को उच्च न्यायालय के समक्ष एक अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की गई।
रेगुलेटर-कम-ब्रिज के तीन शटर खोलने से नुकसान
आपको बता दें कि राज्य सरकार के सिंचाई विभाग द्वारा 20 मई, 2024 को पथलम रेगुलेटर-कम-ब्रिज के तीन शटर खोले गए। छोड़े गए पानी में उच्च कार्बनिक भार और बहुत कम डीओ स्तर था। पानी में बांध के ऊपर की ओर जमा अवायवीय कीचड़ साथ आ गया। उच्च ज्वार की स्थिति, डाउनस्ट्रीम की ओर ज्यादा खराब हो गई, जो शटर खोले जाने के कुछ ही घंटों के भीतर हुई।
मछलियों की मौत का कारण
डी.ओ. से रहित पानी और कार्बनिक कीचड़ का अचानक, निरंतर प्रवाह मछलियों की मौत का कारण बताया गया। इस वजह से बांध के नीचे डी.ओ. के स्तर में तीव्र गिरावट आ गई। आपको बता दें कि 1 अप्रैल से 31 मई तक के डेटा से पता चला है कि पथलम बांध पर डीओ का स्तर गंभीर रूप से कम था, यहाँ तक कि कुछ दिनों में जीरो तक गिर गया। ये पेरियार नदी में छोड़े जा रहे अनुपचारित अपशिष्ट जल या सीवेज के कारण था। लेकिन बांध के नीचे डीओ का स्तर 23 मई से सुधर गया, जो 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर बढ़ गया और ये जल के जीवों के लिए जरूरी है।
केवल पाँच उद्योगों को अनुमति
बता दें कि एलूर-एडयार औद्योगिक क्षेत्र में 43 अपशिष्ट-उत्पादक उद्योग हैं, जो सभी केएसपीसीबी की सहमति से चलते हैं। और इनमें से सिर्फ पाँच उद्योगों को निर्दिष्ट गुणवत्ता के उपचारित अपशिष्टों को पेरियार नदी में छोड़ने की अनुमति है।
