ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी जो कि 25 नवंबर को हुई, के पांचवें चरण की वार्ता हुई, जिसमें एक नए सर्वे के दौरान पता चला कि सिर्फ 52 प्रतिशत अमेरिकी लोगों को पता है कि प्लास्टिक पेट्रोलियम से बनता है। आपको बता दें कि ये सर्वे 10 देशों, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, केन्या, कोरिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित किया गया था।
केन्याई लोगों में प्लास्टिक के बारे में ज्यादा जागरूकता
इस सर्वे में पता चला कि ज्यादातर लोगों को पता है कि प्लास्टिक मुख्य रूप से तेल से बनता है, सिर्फ 52 प्रतिशत अमेरिकी लोग, 58 प्रतिशत कनाडाई और ब्रिटिशों को पता है कि प्लास्टिक मुख्य रूप से तेल से बनता है। इसे अलावा केन्याई उत्तरदाताओं में 63 प्रतिशत और फ्रांसीसी उत्तरदाताओं में 75 प्रतिशत को पता है। यहां ये जानने की जरूरत है कि अमेरिकियों और कनाडाई लोगों की तुलना में केन्याई लोगों में अधिक जानकारी है।
लोगों का जवाब
इस सर्वेक्षण के आधार पर लोगों के जवाब सामने आए, जिस पर स्पेनिश, फ्रांसीसी, ब्रिटिश और कोरियाई उत्तरदाताओं ने प्लास्टिक प्रदूषण के लिए व्यक्तियों की बजाय निगमों या सरकारों को अधिक जिम्मेदार माना है। सर्वेक्षण से पता चला कि वास्तविक रूप से सिर्फ नौ प्रतिशत प्लास्टिक का ही रीसायकल किया जाता है, फिर भी जो लोगों द्वारा औसत अनुमान लगाया गया वो 34 प्रतिशत से 49 प्रतिशत के बीच था।
ब्रेक फ़्री फ़्रॉम प्लास्टिक यूरोप कोऑर्डिनेटर की यूरोप कोऑर्डिनेटर जस्टिन मैलॉट ने कहा कि ये बात सच है कि ज्यादा लोग रीसायकल किए जाने वाले प्लास्टिक की मात्रा का अंदाजा ज़्यादा लगाते हैं। तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज ने आम जनता को ये समझाने के लिए अभियानों पर लाखों डॉलर खर्च किए हैं कि रिसाइकिलिंग प्रभावी है, वास्तविकता तो ये है कि वैश्विक स्तर पर सिर्फ नौ प्रतिशत प्लास्टिक ही कभी रिसाइकिल किया जाता है। 84 प्रतिशत लोगों ने सहमति दिखाई कि प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए प्लास्टिक उत्पादन में कटौती करनी जरूरी है।
भारत प्लास्टिक प्रदूषण रैंकिंग में सबसे आगे
अब भारत की बात करें तो इस सर्वे में भारत को शामिल नहीं किया गया। जबकि सितंबर 2024 में ये पहले बताया था कि भारत प्लास्टिक प्रदूषण रैंकिंग में सबसे आगे है और ग्लोबल प्लास्टिक कचरे का पाँचवाँ हिस्सा उत्पाद कर रहा है। आपको बता दें कि पिछले प्रयासों में चीन को ग्लोबल लेवल पर सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला देश बताया गया था, लेकिन अब चीन चौथे स्थान पर आ गया है।
