रेस्टलेस लेग सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जिसमें पेशेंट को पैरों को रेंगने, पैरों को हिलाने जैसी तेज भावना महसूस होती है। वहीं यह बीमारी रात या शाम के समय बहुत ज्यादा महसूस होती है। इससे न केवल आपकी नींद प्रभावित होती है बल्कि आप में स्ट्रेस, डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिसीज आदि समस्याएं बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं यह बीमारी अधिकतर बुजुर्गों में होता है। ऐसे में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के इलाज के लिए हाल ही में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टीम ने जेनेटिक सुझाव ढूंढ निकाले हैं। चली इस स्टडी के बारे में जानते हैं।

आखिर क्या है पूरी स्टडी

जर्मनी के म्यूनिख यूनिवर्सिटी (TUM) और केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चरस के मुताबिक रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का उपचार ढूँढने के लिए तीन जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडीज से डेटा इकट्ठा किया गया और इसका विश्लेषण किया गया है। हालांकि आपको बता दें कि जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडी एक विशेष प्रकार की फेनोटाइप या बीमारी के जोखिम से जुड़े आनुवंशिक मार्करों को खोजने के लिए कई अलग-अलग लोगों के जीनोम की तुलना करने का एक दृष्टिकोण है। जिसमें 100,000 से अधिक मरीज और 1.5 मिलियन से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित थे

स्टडी में क्या पाया गया

बता दें कि स्टडी की रिपोर्ट नेचर जेनेटिक्स पत्रिका में पब्लिश हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 140 से अधिक नए जेनेटिक रिस्क स्थलों की जांच किया गया है। जिसमें पाया गया कि यह 140 से बढ़कर 8 गुना यानी 164 हो गया है, जोकि तीन एक्स क्रोमोसोम पर हैं।

महिलाओं में पुरुषों की तुलना अधिक रिस्क

रिसर्चर का मानना है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई विशेष जेनेटिक अंतर नहीं है। लेकिन इसके बावजूद इस कंडीशन में इस बीमारी का रिस्क महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले दो गुना अधिक पाया जाता है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के इलाज के लिए दिए गए सुझाव 

केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉ. स्टीवन बेल ने बताया कि रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की उपचार के लिए इसकी जेनेटिक के बारे में अच्छे से समझना और जानना बेहद जरूरी है। इसी के आधार पर हम इसके इलाज के लिए बेहतर तरीकों का पता लगा सकते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि जेनेटिक अंतरों में से दो में ग्लूटामेट रिसेप्टर्स 1 और 4 जैसे जीन शामिल होते हैं। जो तंत्रिका और दिमाग के काम के लिए काफी जरूरी हैं। वहीं रिसर्चरस की टीम ने बताया कि आधुनिक समय में मौजूदा दवाओं से इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है। जिसमें से पेरामपेनल और लैमोट्रिजिन जैसी एंटीकंवल्सेंट्स दवाइयां शामिल है। जिन्हें नई दवाओं को विकसित करने के लिए भी यूज में लाया जा सकता है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम क्या है

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जिसमें पेशेंट को पैरों को रेंगने, पैरों को हिलाने जैसी तेज भावना महसूस होती है। बता दें कि यह एक मस्तिष्क, तंत्रिका और नींद की स्थिति है। जो रात या शाम के समय बहुत ज्यादा महसूस होता है। इससे न केवल आपकी नींद प्रभावित होती है बल्कि आप में स्ट्रेस, डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिसीज आदि समस्याएं बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं यह बीमारी अधिकतर बुजुर्गों में होता है।

क्या है इसके लक्षण

पैरों को बहुत ज्यादा हिलाने का मन करना

थकान होना

दिन में नींद आना

चीजों पर फोकस करने में दिक्कत होना

By tnm

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