ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित एम्स अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक चमत्कारी सफलता हासिल की है। यहां के डॉक्टरों ने एक ऐसे मरीज को मौत के मुंह से बाहर निकाला, जिसका दिल 80 मिनट तक रुक गया था। इस घटना ने न केवल ओडिशा बल्कि पूरे भारत के चिकित्सा समुदाय को हैरान कर दिया। डॉक्टरों ने ECMO (Extracorporeal Membrane Oxygenation) तकनीक का उपयोग करके मरीज की जान बचाई।
80 मिनट तक रुका दिल, फिर भी बची जान
यह घटना 1 अक्टूबर की सुबह की है, जब ओडिशा के नयागढ़ जिले के 25 वर्षीय शुभकांत साहू को गंभीर सांस की समस्या के बाद एम्स भुवनेश्वर लाया गया था। उनकी स्थिति नाजुक थी, और इलाज के दौरान अचानक उनके दिल की धड़कन बंद हो गई। डॉक्टरों ने 40 मिनट तक CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) देकर दिल की धड़कन लौटाने की कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। ऐसे में डॉक्टरों के पास दो विकल्प थे या तो उन्हें मृत घोषित कर दिया जाए, या फिर ECMO तकनीक का इस्तेमाल किया जाए।
ECMO तकनीक ने किया चमत्कार
ECMO एक विशेष चिकित्सा उपकरण है, जो अस्थायी रूप से दिल और फेफड़ों के काम को निभाता है। शुभकांत की धड़कन फिर से शुरू करने के लिए डॉक्टरों ने ECMO पर उन्हें डाला। 40 मिनट के भीतर उनकी धड़कनें लौट आईं, हालांकि उनका दिल कुल 80 मिनट तक बंद रहा। यह एक चमत्कारिक घटना मानी जा रही है।
शुभकांत को ECMO पर 30 घंटे तक रखा गया, और फिर दो हफ्तों तक उन्हें वेंटिलेटर पर निगरानी में रखा गया। अंततः शुभकांत ने होश में आकर अपनी आंखें खोलीं। अब उनकी स्थिति सामान्य है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।
ओडिशा और पूर्वी भारत में पहली घटना
एम्स भुवनेश्वर के डॉक्टरों के अनुसार यह घटना ओडिशा और पूर्वी भारत में इस तरह की पहली घटना है। इस चमत्कारी बचाव ने चिकित्सा जगत में नई उम्मीदों की किरण दिखाई है। शुभकांत के परिवार ने डॉक्टरों और पूरे मेडिकल स्टाफ का आभार व्यक्त किया। यह घटना डॉक्टरों की प्रतिबद्धता, निस्वार्थ सेवा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की ताकत का प्रतीक है।
इस उपलब्धि ने न केवल ओडिशा, बल्कि पूरे देश के चिकित्सा समुदाय में प्रेरणा का संचार किया है। यह घटना बताती है कि आधुनिक चिकित्सा के जरिए मौत को भी हराया जा सकता है, और डॉक्टरों की मेहनत और तकनीकी ज्ञान के बल पर असंभव को संभव बनाया जा सकता है।
