राजधानी लखनऊ में निजी अस्पतालों की लापरवाही से मरीजों की मौत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब स्वास्थ्य विभाग इस पर सख्त हो गया है और इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने सोमवार को निजी अस्पतालों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन सख्ती से कराया जाएगा। निर्देशों के उल्लंघन पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें ताले तक लगवाने की बात की गई है।
निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़े निर्देश
लखनऊ में लगभग 1,000 निजी अस्पताल सीएमओ कार्यालय से पंजीकृत हैं। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों को केवल उसी विशेषता में इलाज करना होगा, जिसके लिए वे पंजीकृत हैं। यदि किसी अस्पताल में असाध्य बीमारियों का इलाज बिना किसी विशेषज्ञ के किया जाता है, तो उस अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों में इलाज कर रहे डॉक्टरों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों के पैनल में शामिल डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करेंगे। यदि किसी अस्पताल में बाहरी डॉक्टर से इलाज कराया जाता है, तो अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मरीजों की फाइल पर डॉक्टर का नाम और उनकी अन्य जानकारियां भी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए।
पैनल में डॉक्टरों का Update
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि कोई डॉक्टर निजी अस्पताल छोड़कर जाता है, तो उसकी सूचना सीएमओ कार्यालय को दी जाए, ताकि उसे अस्पताल के पैनल से हटाया जा सके। इस तरह की जानकारी न देने पर भी अस्पताल पर कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी और कड़ी कार्रवाई
नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह ने बताया कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) प्रभारियों को उनके क्षेत्र में आने वाले निजी अस्पतालों की सख्त निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी अस्पताल द्वारा नियमों की अनदेखी की जाती है, तो उस अस्पताल के संचालन पर रोक भी लगाई जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम निजी अस्पतालों में हो रही लापरवाही को रोकने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ गई है, और अस्पतालों पर निगरानी की सख्त व्यवस्था से लापरवाही की गुंजाइश कम होगी।
