कहते हैं आंखों से दिल का हाल पता लग जाता है। जो भी आपके मन में हो वे आंखों में झलकता है। लेकिन इसके अलावा बीमारियों को भी आंखों से जाना जा सकता है, इसिलिए डॉक्टर भी चेकअप से पहले आंखों को देखते हैं। बात अगर थायरॉइड की करें तो इसका सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं में होता है।
अगर इस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये गंभीर रूप ले सकती है। थायरॉइड का पता भी आंखों से किया जा सकता है। जो लोग इससे पीड़ित होते हैं उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और जब तक इसे डायग्नोस न किया जाए परेशानी दूर नहीं होती। चलिए जानते हैं आंखों पर इसके क्या प्रभाव पड़ता है।
Thyroid
थायराइड कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर का एक हिस्सा है। ये थायराइड ग्लैंड गले के नीचे वाले हिस्से में होती है। अगर शरीर को चलाना है तो थायराइड हॉर्मोन की जरूरत होती है। इसी से ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन, सेक्स ड्राइव, पीरियड्स, प्रेगनेंसी, खुशी, गमी आदि सब तय होता है। जब इसे रिलीज करने वाले थायराइड ग्लैंड में असंतुलन आता है या कम और ज्यादा रिलीज होने लगे तो इसे थायरॉइड की बीमारी कहते हैं।
आंखों बताती हैं थायरॉइड की हालत
आंखों का अंदर धंसना या लाल होना
जब थायरॉइड की स्थिती होती है तो आंखें अंदर की तरफ धंस जाती है। चाहे थायरॉइड कम हो या ज्यादा। साथ ही आंखें लाल और सूजी हुई भी नजर आती हैं।
अंधापन या धुंधलापन
जिसे हाइपरथायरायडिज्म होता है, उनकी आंखों की रोशनी कम हो सकती है। इस वजह से उन्हें धुंधला नजर आ सकता है। थायरॉइड की समस्या है तो आंखों में दर्द और तनाव भी महसूस होगा।
आंखों का बाहर निकलना
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, थायरॉइड आई डिजीज एक तरह की ऑटोइम्यून बीमारी होती है। इसमें आंखों के आसपास के हिस्सों या टिश्यू को नुकसान होता है। नुकसान की वजह से आंखें उभर आती हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
