वैज्ञानिकों ने डेंगू, पीला बुखार और जीका जैसे मच्छर जनित बीमारियों से लड़ने का एक नया तरीका ढूंढ लिया है। उन्होंने कहा कि – नर मच्छरों को बहरा बनाकर ताकि वे संभोग और प्रजनन न कर पाए। उड़ान के दौरान नर और मादा मच्छर दोनों ही अलग-अलग आवृत्तियों पर अपने पंखों को फड़फड़ाते हुए ध्वनि को उत्पन्न करते हैं। एडीज नर इस पंख की धड़कन से आकर्षित होते हैं। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक इस्तेमाल किया जिसमें उन्होंने नर मच्छर के द्वारा सुनने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आनुवांशिक मार्ग को ही बदल दिया।
कुछ ऐसे थे नतीजे
परिणामों से यह पता चला कि तीन दिनों तक एक ही पिंजरे में रहने के बाद भी उन्होने मादों के साथ कोई शारीरिक संबंध नही बनाया। औसतन नर मच्छर मादा के संपर्क में आने के 20 सैकेंड के अंदर संभोग और गर्भाधान पूरा कर लेते हैं और लगभग हमेशा एक मिनट से भी कम समय में। वैज्ञानिकों ने (TRPVA) टीआरपीवीए नाम के प्रोटीन को लक्षित किया जिसे सुनने के लिए जरुरी माना जाता है। परिणामों से यह पता चला कि इस्तेमाल किए गए मच्छरों में न्यूरॉन्स जो ध्वनि का पता लगाने में मदद करते हैं मादाओं की उड़ान की आवाज या पंखों की धड़कन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाते हैं। अध्ययन में यह कहा गया कि (टीआरपीवीए)TRPVA1/2 उत्परिवर्ती नरों ने आवृत्ति की परवाह किए बिना किसी भी तरह का ध्वनि आकर्षण नहीं दिखाया जिससे यह पता चलता है कि टीआर पीवीए ध्वनि आकर्षण के लिए जरुरी है। नर मच्छरों पर किए गए सभी टेस्ट के आयामों पर 400 हर्ट्स टोन के प्रति अनुत्तरदायी थी जो कि सुनने की उत्तेजना पर प्रतिक्रिया करने पर उत्परिवर्तन के गहन प्रभाव को और प्रदर्शित करते हैं।

ऐसे रोकेगा बीमारियों को फैलने से
मादा मच्छर के कारण हर साल लगभग 400 मिलियन लोगों को बीमारियों फैलती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्हें बच्चे पैदा करने से रोकने की कोशिश करने से कुल संख्या को कम करने में मदद मिलेगी। यदि नर मच्छर संभोग नहीं कर सकते तो निषेचन नहीं होगा और नए मच्छरों के लिए अंडे भी नहीं बनेंगे।

नर मच्छरों को बहरा बनाने के अलावा वैज्ञानिक बांझ नरों के उन क्षेत्रों में छोड़ने की संभावना भी तलाश रहे हैं जहां मच्छरों से फैलने वलाी बीमारियां ज्यादा होती है।
