आज के समय में बालों का झड़ना पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक सामान्य समस्या बन गई है। इसके समाधान के लिए हेयर विग और पैच का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये विग और पैच कैसे बनते हैं, इनके लिए बाल कहां से आते हैं और ये कितने सुरक्षित होते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में।

हेयर विग का इतिहास

हेयर विग और एक्सटेंशन का इतिहास प्राचीन मिस्र से शुरू होता है, जहां 3400 ईसा पूर्व में इसे स्टेटस सिंबल माना जाता था। उस समय रानी क्लियोपेट्रा जैसी हस्तियों ने भी हेयर एक्सटेंशन का इस्तेमाल किया था। 16वीं शताब्दी में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने हेयर विग पहनना शुरू किया। फिर 17वीं और 18वीं शताब्दी में फ्रांस में भी इसका चलन बढ़ा।

भारत में हेयर का कारोबार

भारत में हेयर के बिजनेस में पिछले कुछ दशकों में तेजी आई है। 2021 में हेयर विग्स का कारोबार 48 हजार करोड़ रुपये का था, जो 2024 तक 82 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारत मानव बाल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, जहां 2022 में 11.7 अरब रुपये के बाल निर्यात किए गए।

हेयर पैच बनने की प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में जेमेरिया हेयर की फैक्ट्री में हेयर पैच बनाने की प्रक्रिया को समझाते हुए, कंपनी के डायरेक्टर शशि कांत त्यागी बताते हैं कि इसमें सात चरण होते हैं। सबसे पहले, बालों की नीलामी में भाग लिया जाता है। उसके बाद इन बालों को बोरे में भरकर फैक्ट्री लाया जाता है। इसके बाद बालों को उलझने से बचाने के लिए अलग किया जाता है और फिर उन्हें धुलकर सुखाया जाता है। सुखाने के बाद बालों को एक समान लंबाई में काटा जाता है और हेयर वेफ्ट बनाए जाते हैं।

बाल कहां से आते हैं?

हेयर विग और पैच में इस्तेमाल होने वाले बाल आमतौर पर दक्षिण भारत के मंदिरों से आते हैं। वहां के बालों को सबसे अच्छे माना जाता है, जिनकी कीमत लंबाई के अनुसार 9-10 हजार रुपये प्रति किलो से शुरू होती है। भारतीय मार्केट में ये हाई क्वालिटी के होते हैं और इन्हें मोनोफिलामेंट फैब्रिक पर हाथ से बनाया जाता है।

डॉक्टर्स की राय

एक्सपर्ट्स के मुताबिक हेयर पैच सुरक्षित हैं, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि इन्हें अच्छे वेंडर से खरीदा जाए। लंबे समय तक पहनने से त्वचा डैमेज हो सकता है, इसलिए समय-समय पर इन्हें निकालकर साफ करना चाहिए।

हेयर विग के बारे में रोचक तथ्य

भारत में हेयर विग का चलन मुगलों के दौर से शुरू हुआ। दरबार में पुरुष विग पहनते थे जो उनके पद और प्रतिष्ठा का प्रतीक था। धीरे-धीरे, 1960 और 70 के दशक में बॉलीवुड में भी हेयर विग का उपयोग बढ़ा।

इस प्रकार हेयर विग और पैच का बाजार केवल एक सौंदर्य साधन नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा व्यवसाय भी है। आज की युवा पीढ़ी में इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। बालों की सुंदरता को बनाए रखने के लिए यह एक आकर्षक और प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हमेशा विशेषज्ञ से सलाह लें।

By tnm

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