टीबी एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण तेजी से फैलने वाला रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष 80 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं। यह आंकड़ा संयुक्त राष्ट्र एजेंसी द्वारा ट्रैकिंग शुरू करने के बाद से सबसे अधिक है, जो इस बात का संकेत है कि टीबी महामारी का रूप धारण कर सकती है।
टीबी की बढ़ती संख्या
WHO के अनुसार टीबी का संक्रमण विश्व की लगभग 1/4 आबादी को प्रभावित करता है। इसके शुरुआती लक्षण केवल 5-10 प्रतिशत लोगों में ही दिखाई देते हैं, जिससे पहचान में देरी होती है। विशेष रूप से WHO ने चेतावनी दी है कि जल्द ही टीबी कोविड-19 की जगह ले सकता है, जिससे इसे एक महामारी में तबदील होने की संभावना बढ़ गई है। यह गंभीर स्थिति वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक चुनौती बन गई है।
टीबी से होने वाली मौतें
पिछले साल टीबी से 1.25 मिलियन से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। यह आंकड़ा महामारी के दौरान कोविड-19 के प्रभाव के कारण टीबी के पुनः उभरने की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी से होने वाली मौतों की संख्या भी टीबी से होने वाली मौतों के करीब पहुंच सकती है।
प्रभावित देश
WHO की रिपोर्ट के अनुसार टीबी मुख्यतः दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में लोगों को प्रभावित कर रहा है। भारत, इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस और पाकिस्तान जैसे देश वैश्विक मामलों के आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। इन देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता की कमी टीबी के मामलों को बढ़ाने में सहायक हो रही है।
WHO का बयान
WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने इस स्थिति को अपमानजनक बताया है, क्योंकि हमारे पास इस बीमारी को रोकने, पहचानने और इलाज करने के लिए साधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि टीबी से होने वाली मृत्यु दर में कमी आ रही है, लेकिन नए संक्रमित लोगों की संख्या स्थिर बनी हुई है। पिछले वर्ष दवा-प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित 400,000 रोगियों में से आधे से भी कम का निदान और उपचार किया गया।
टीबी के संक्रमण का कारण
टीबी एक एयरबॉर्न बैक्टीरिया इंफेक्शन है जो अधिकतर फेफड़ों पर हमला करता है। यह हवा के माध्यम से फैलता है, जिससे संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक या बात करते समय बैक्टीरिया अन्य लोगों में फैल सकते हैं। जबकि दुनिया की एक चौथाई आबादी को टीबी होने का अनुमान है, केवल 5-10 प्रतिशत लोग ही लक्षण विकसित करते हैं। इससे यह रोग चुपचाप फैलता रहता है।
