एक तरफ चुनाव का माहौल है, वहीँ दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ध्यान साधना में लीन हैं। दरअसल शुक्रवार को सुबह प्रधानमंत्री ने मां अम्मन मंदिर में पूजा अर्चना की और इसके बाद विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ध्यान केंद्र में ध्यान साधाना में तल्लीन हो गए। आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 48 घंटे तक ध्यान साधना में तल्लीन रहने वाले हैं। वहीँ ये ध्यान साधना भारत की बहुत प्राचीन परंपरा है और योग का अगला पड़ाव भी है।
48 घंटे ध्यान करने से क्या होता है
बता दें कि ध्यान करना अपने आप में एक साधना है, जिसे करने के लिए मन में एक दृढ़ इच्छा का होना बेहद जरुरी है। ध्यान मन को शांत करने का एक जरिया है। वहीँ इसके अलावा यदि आप 48 घंटे तक ध्यान में लीन रहते हैं तो आपने जो दृश संकल्प लिया होता है वो अवश्य ही पूरा होता है। वह विचारधारा सत्य की तरफ अपना रुख ले लेती है। बता दें कि लंबे ध्यान में बीच में शरीर के आवश्यक कार्य को भी किया जा सकता है। इसमें पानी भी सकते हैं, हल्का आहार भी ले सकते हैं। लेकिन आवश्यक यह है कि हम जिस विचार को लेकर चल रहे है वह दिशा पकड़ कर रखें। इसमें दिशा न भटके। जब कोई विचार 48 घंटे तक सतत प्रवाहित होता है तो वो विचार अपने अस्तित्व को धारण करने लगता है वह सत्य होने लगता है। यह कार्य सिद्धि की ओर जाता है।
ध्यान करने का महत्त्व
बता दें ध्यान करने से न केवल आध्यात्मिक बल्कि मानसिक और शारीरिक लाभ भी मिलते हैं। इसलिए हर किसी को ध्यान करना चाहिए। वहीँ ये भी बता दें कि आज के जीवन में तनाव सबसे बड़ी बीमारी बना हुआ है, जो लगभग हर दूसरे इंसान को है। वहीँ अधिकांश बीमारियों के लिए तनाव ही जिम्मेदार है। ऐसे में ध्यान तनाव को दूर करने का काम करता है। अगर मन तनाव से आजाद हो जाए तो शरीर स्वतः ही स्फूर्त महसूस करता है। इतना ही बॉडी energetic हो जाती है। कुछ नया करने का रोमांच पैदा हो जाता है। ध्यान तनाव को भगाता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। ध्यान हमारे मनोभावों को क्रेंद्रित करने में सक्षम है। ऐसे में आप भी इस ध्यान का अभ्यास कर अपने जीवन को तनावमुक्त बना सकते हैं।
