हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मिस्र को मलेरिया मुक्त देश घोषित किया है। यह घोषणा न केवल मिस्र के 100 मिलियन से अधिक निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि है, बल्कि यह एक सदी से अधिक समय की मेहनत का परिणाम भी है। मलेरिया जो प्राचीन मिस्री सभ्यता से लेकर अब तक वहां मौजूद रहा है, अब इतिहास बन चुका है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि यह मिस्र के लोगों और सरकार की मेहनत का फल है।
मिस्र बना मलेरिया मुक्त तीसरा क्षेत्र
मिस्र इस क्षेत्र का तीसरा देश है जिसे WHO ने मलेरिया मुक्त प्रमाणित किया है। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात और मोरक्को ने भी इस प्रमाणन को प्राप्त किया था। खास बात यह है कि मिस्र 2010 के बाद से इस प्रमाणन को प्राप्त करने वाला पहला देश है। यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिखाती है कि देश ने मलेरिया जैसी बीमारी के खिलाफ एक ठोस योजना के तहत काम किया है और इसके प्रति जनता में जागरूकता फैलाई है।
40 देश हो चुके हैं मलेरिया-मुक्त
साल 2021 तक, WHO ने 40 देशों को मलेरिया-मुक्त के रूप में प्रमाणित किया है। इनमें से मलेशिया और इस्लामी गणराज्य ईरान ने शून्य स्वदेशी मलेरिया मामलों की स्थिति हासिल की है। अज़रबैजान और ताजिकिस्तान भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं और प्रमाणन के लिए आवेदन कर चुके हैं।
मलेरिया से लड़ाई के लिए विभिन्न देशों ने कई उपाय किए हैं। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया के सबसे अधिक मामले उप-सहारा अफ्रीका में पाए जाते हैं, जबकि इसके कुछ मामले ओशिनिया, मध्य और दक्षिण अमेरिका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में भी हैं। ठंडे क्षेत्रों में मलेरिया का प्रसार अपेक्षाकृत कम और मौसमी होता है।
मिस्र बना अन्य देशों की प्रेरणा
मिस्र की सफलता की कहानी ने अन्य देशों के लिए प्रेरणा का काम किया है। 2019 में अल्जीरिया को भी मलेरिया मुक्त घोषित किया गया था, जो कि अफ्रीका का तीसरा ऐसा देश बना। इससे पहले 2010 में मोरक्को और 1973 में मॉरीशस ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इन सभी देशों ने मलेरिया के खिलाफ एक दीर्घकालिक रणनीति अपनाई, जिसमें वेक्टर नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, और जन जागरूकता शामिल थी।
मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नए उपचार और टीकों के विकास से मलेरिया के मामलों में कमी आई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकारी योजनाओं ने भी इस दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाला है।
